अल्मोड़ा: अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चे न सिर्फ पढ़ाई करेंगे, बल्कि सड़क सुरक्षा के नियम भी खेल-खेल में सीखेंगे। परिवहन विभाग की इस अनोखी पहल के तहत अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के प्राथमिक विद्यालयों में “रोड सेफ्टी कॉर्नर” बनाए जा रहे हैं। इन कॉर्नरों में विद्यार्थियों को यातायात से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जा रही है ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
पहले चरण में चार स्कूलों में हुई शुरुआत
परिवहन विभाग ने पहले चरण में अल्मोड़ा के प्राथमिक विद्यालय फलसीमा, स्यालीधार, द्वारसों और कठपुड़िया में रोड सेफ्टी कॉर्नर स्थापित किए हैं। इन स्कूलों में अब बच्चे यातायात नियमों को नजदीक से समझ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों के माध्यम से समाज में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है। उनका मानना है कि बाल अवस्था में डाले गए संस्कार जीवनभर कायम रहते हैं, इसलिए बच्चों को शुरुआती उम्र से ही सड़क सुरक्षा के नियम सिखाना बेहद जरूरी है।
रचनात्मक गतिविधियों के जरिये दी जा रही शिक्षा
इन रोड सेफ्टी कॉर्नरों में विद्यार्थियों को संवादात्मक और रचनात्मक तरीकों से यातायात नियमों की जानकारी दी जा रही है। विद्यालय की दीवारों पर आकर्षक चित्रों और पेंटिंग्स के माध्यम से गुड समेरिटन कानून, हिट एंड रन मामलों की जानकारी, सड़क पर चलने के 10 स्वर्णिम नियम और यातायात संकेत चिह्नों को प्रदर्शित किया गया है। इस पहल से बच्चों में रुचि भी बढ़ रही है और संदेश गहराई तक पहुंच रहा है।
विद्यार्थी खुद बनाएंगे मॉडल और संकेत बोर्ड
बच्चों को यातायात की व्यावहारिक समझ देने के लिए उन्हें खुद मॉडल बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कार्डबोर्ड, क्ले, आइसक्रीम स्टिक और रंगीन कागज की मदद से छात्र सड़क के छोटे मॉडल, ट्रैफिक सिग्नल और सुरक्षित ड्राइविंग के चित्र तैयार कर रहे हैं। इससे न सिर्फ उनकी रचनात्मकता बढ़ेगी, बल्कि वे अपने परिवार और समुदाय में भी सड़क सुरक्षा के संदेशवाहक बनेंगे।
सुरक्षा के संस्कार बचपन से जरूरी
संभागीय परिवहन अधिकारी अनीता चंद ने बताया कि विभाग का उद्देश्य बच्चों के माध्यम से सड़क सुरक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा, “बाल अवस्था में दी गई शिक्षा जीवनभर साथ रहती है। ऐसे में अगर बच्चे अभी से सड़क सुरक्षा के नियम सीख लें, तो भविष्य में दुर्घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।”
यह पहल न केवल विद्यार्थियों को यातायात नियमों के प्रति सजग बनाएगी, बल्कि उनके माध्यम से समाज में भी सुरक्षा के प्रति नई सोच और जागरूकता का संचार करेगी।





