अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

Uttarakhand: भूकंप से निपटने की तैयारियों की जांच के लिए आज प्रदेशभर में मॉक ड्रिल, डिजिटल ट्विन तकनीक का होगा उपयोग

On: November 14, 2025 6:42 AM
Follow Us:

उत्तराखंड में भूकंप से बचाव और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का परीक्षण करने के लिए 15 नवंबर को पूरे प्रदेश में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में हुई समीक्षा बैठक में ड्रिल की रूपरेखा, व्यवस्थाओं और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य डॉ. डीके असवाल ने कहा कि इस बार मॉक ड्रिल को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल ट्विन तकनीक का प्रयोग किया जाना चाहिए। यह तकनीक किसी भवन या क्षेत्र की डिजिटल प्रति तैयार करती है, जिससे वास्तविक परिस्थितियों जैसी स्थितियों में बिना जोखिम अभ्यास संभव हो पाता है। उन्होंने कहा कि भविष्य की मॉक ड्रिलों में इस आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाना चाहिए ताकि आपदा के हालात का और बेहतर विश्लेषण हो सके।
डॉ. असवाल ने बताया कि उत्तराखंड भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। ऐसे में पहले से तैयारी, समुदायों का प्रशिक्षण और संसाधनों का आकलन बेहद आवश्यक है।
राज्य सलाहकार समिति आपदा प्रबंधन के उपाध्यक्ष विनय कुमार रुहेला ने कहा कि आपदाओं से मिली सीख ही भविष्य की सुरक्षा तय करती है। यदि पिछले अनुभवों पर तुरंत और प्रभावी तरीके से काम किया जाए तो किसी भी आपदा का सामना बेहतर ढंग से किया जा सकता है।
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य सभी जिलों की तैयारी, प्रतिक्रिया क्षमता और संसाधनों की स्थिति का परीक्षण करना है। भूकंप जैसी आकस्मिक स्थिति में तुरंत और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना ही ड्रिल का प्रमुख लक्ष्य है।
बैठक में आनंद स्वरूप, विनीत कुमार, ब्रिगेडियर राजू सेठी, ओबैदुल्लाह अंसारी, शांतनु सरकार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
‘भूदेव एप’ डाउनलोड करने के निर्देश
सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि IIT रुड़की और USDMA द्वारा विकसित ‘भूदेव एप’ भूकंप की स्थिति में मोबाइल पर अलर्ट भेजता है। मॉक ड्रिल में शामिल सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने मोबाइल में यह एप अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन परिस्थितियों पर आधारित होगी मॉक ड्रिल
• बहुमंजिला आवासीय भवन का ढह जाना
• अस्पताल भवन का आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होना
• स्कूल/कॉलेज में ढांचागत नुकसान होने से छात्रों का फंसना
• बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास
इस मॉक ड्रिल के माध्यम से प्रदेश यह परखेगा कि भूकंप जैसी आपदा की स्थिति में विभिन्न विभाग कितनी तेजी और प्रभावशीलता से प्रतिक्रिया दे सकते हैं। तैयारियों में मौजूद कमियों को पहचानकर उन्हें दूर किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी आपदा का सामना अधिक मजबूती से किया जा सके।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment