देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। Uttarakhand MLA Umesh Kumar Resignation का ऐलान होने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हरिद्वार जिले की चर्चित खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने उत्तराखंड विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र के शुरू होने से ठीक पहले विधायकी से त्यागपत्र देने की घोषणा की है। विधायक का आरोप है कि प्रदेश का विपक्ष और सरकार दोनों ही जनता की बुनियादी समस्याओं, खासकर किसानों के नुकसान पर पूरी तरह मौन हैं।
Uttarakhand MLA Umesh Kumar Resignation On Farmer Issues: किसानों की बर्बादी पर कोई नहीं खड़ा
Uttarakhand MLA Umesh Kumar Resignation के पीछे मुख्य वजह हरिद्वार जिले में किसानों की फसलों का भारी नुकसान होना बताया जा रहा है। विधायक उमेश कुमार ने कहा कि हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा और मौसम की मार के कारण हरिद्वार क्षेत्र में किसानों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब जनता और किसान खून के आंसू रो रहे हैं, तब जनप्रतिनिधि और विपक्षी दल मौन साधे बैठे हैं। किसानों की आवाज को विधानसभा पटल पर उठाने और उन्हें मुआवजा दिलाने के मुद्दे पर कोई भी उनका साथ देने को तैयार नहीं है। ऐसे माहौल में केवल नाममात्र का विधायक बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
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विपक्ष की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
खानपुर विधायक ने सत्ता पक्ष के साथ-साथ मुख्य विपक्षी दल पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी जनता की आवाज बनना होती है, लेकिन उत्तराखंड में विपक्ष अपनी भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल रहा है।
”जब भी मैंने जनहित और किसानों के हक की बात उठानी चाही, विपक्ष ने केवल दूरी बनाई। जनता के गंभीर मुद्दों पर सदन में चर्चा करने के बजाय राजनीति की जा रही है।”
— उमेश कुमार, निर्दलीय विधायक (खानपुर)
विधायक ने स्पष्ट किया कि जब तक वे सदन के अंदर जनता की आवाज को मजबूती से परिणाम तक नहीं पहुंचा सकते, तब तक उस सदन का हिस्सा बने रहने का कोई मतलब नहीं है।
‘न भाजपा में जाऊंगा, न कांग्रेस में’ — राजनीतिक कयासों पर विराम
इस्तीफे की घोषणा के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि क्या उमेश कुमार किसी राष्ट्रीय पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इन सभी अटकलों पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है।
- निर्दलीय रुख कायम: उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह न तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे और न ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में।
- स्वाभिमान से समझौता नहीं: उन्होंने कहा कि वे उन नेताओं की जिंदाबाद के नारे कभी नहीं लगा सकते, जो कल तक अपनी राजनीतिक जरूरतों के लिए उनके दरवाजे पर आकर बैठते थे।
- जनता के बीच संघर्ष: उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी दल के झंडे तले जाने के बजाय स्वतंत्र रहकर सीधे जनता के बीच संघर्ष करेंगे।
Uttarakhand Assembly Session से ठीक पहले गरमाई राजनीति
उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले आए इस बयान ने राजनीतिक दलों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
विधानसभा सत्र के मुख्य राजनीतिक पहलू:
| राजनीतिक दल / स्थिति | वर्तमान रुख |
|---|---|
| निर्दलीय विधायक (उमेश कुमार) | बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष को सौंपेंगे इस्तीफा |
| सत्ता पक्ष (BJP) | स्थिति पर नजर बनाए हुए है |
| विपक्ष (Congress) | आरोपों को लेकर बचाव की मुद्रा में |
बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपना त्यागपत्र सौंपने की तैयारी कर रहे उमेश कुमार के इस कदम से हरिद्वार क्षेत्र के स्थानीय समीकरणों में बड़ा फेरबदल होना तय माना जा रहा है।
आगे की राह: खानपुर की जनता के बीच रहेगा ठिकाना
विधायक पद छोड़ने की घोषणा करते हुए उमेश कुमार ने खानपुर की जनता को भरोसा दिलाया कि उनका यह कदम जनहित में उठाया गया है। वे आगे भी बिना किसी पद के हरिद्वार और खानपुर के निवासियों, विशेषकर पीड़ित किसानों के हक की लड़ाई सड़क पर उतरकर लड़ेंगे।
अब सभी की निगाहें बुधवार को विधानसभा में होने वाली हलचल पर टिकी हैं, जहां विधायक आधिकारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
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