Uttarakhand Minority Education: उत्तराखंड में Minority Education को लेकर राज्य सरकार ने नए शिक्षा ढांचे के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को राज्य के 26 Minority Educational Institutions को मान्यता प्रमाणपत्र सौंपे। इनमें देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिले के मदरसे तथा अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान शामिल हैं। इसी दौरान ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर क्षेत्र में बिना जरूरी मान्यता और दस्तावेजों के संचालित पाए गए पांच मदरसों को प्रशासन ने सील कर दिया।
सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था को नए नियामकीय ढांचे के तहत लाने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों के बच्चों को समान अवसर देते हुए आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
Uttarakhand Minority Education: 26 Minority Institutes को मिले Recognition Certificates
देहरादून में आयोजित “New Identity, New Respect – A Bright Future through Modern Education” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को Recognition Certificates प्रदान किए। सरकार के अनुसार यह राज्य में Minority Education के लिए नए और व्यवस्थित ढांचे की शुरुआत है।
इन संस्थानों में मदरसे और अन्य Minority Educational Institutions शामिल हैं। मान्यता मिलने के बाद इन संस्थानों के लिए निर्धारित शैक्षणिक और प्रशासनिक मानकों के तहत काम करने का रास्ता साफ हुआ है।
मुख्यमंत्री ने इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में सकारात्मक शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी बच्चों को उनकी सामाजिक या अन्य पृष्ठभूमि से अलग हटकर अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
बाजपुर में 5 मदरसों पर प्रशासन की कार्रवाई
जहां एक ओर 26 संस्थानों को मान्यता दी गई, वहीं ऊधम सिंह नगर के बाजपुर क्षेत्र में प्रशासन ने बिना जरूरी Recognition और दस्तावेजों के संचालित पांच मदरसों को सील कर दिया।
अधिकारियों के मुताबिक निरीक्षण के दौरान संबंधित संस्थानों के संचालक आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई की। कार्रवाई बाजपुर की SDM ऋचा सिंह और कोतवाली निरीक्षक नरेश चौहान के नेतृत्व में की गई।
सील किए गए संस्थानों में मदरसा जामिया हनफिया रजाउत-उल-उलूम, मदरसा जामिया फातिमा और मदरसा हुज्जतुल इस्लाम शामिल हैं। इसके अलावा केलाखेड़ा-बाजपुर के गांधीनगर क्षेत्र स्थित मदरसा मोइनुल उलूम और कनौरा स्थित मदरसा गुलशन-ए-इस्लाम पर भी कार्रवाई की गई।
Uttarakhand Minority Education: Recognition नहीं होने पर आगे भी होगी कार्रवाई
ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया के अनुसार जिले में मदरसों का निरीक्षण अभियान जारी है। प्रशासन ऐसे संस्थानों की जांच कर रहा है जो निर्धारित Recognition हासिल नहीं कर पाए हैं या जिनके पास आवश्यक दस्तावेज और मानकों से संबंधित अनुपालन नहीं है।
प्रशासन ने संकेत दिया है कि जांच के दौरान नियमों का पालन नहीं करने वाले अन्य संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इससे साफ है कि सरकार नए Minority Education framework को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि संस्थानों के संचालन को निर्धारित नियमों के दायरे में लाने पर जोर दिया जा रहा है।
1 जुलाई से लागू हुआ नया Minority Education Framework
उत्तराखंड सरकार ने Minority Educational Institutions के लिए नया नियामकीय ढांचा तैयार किया है। इसके तहत Uttarakhand State Authority for Minority Education की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। नए सिस्टम के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार Recognition प्राप्त करना जरूरी है।
सरकार ने इससे पहले स्पष्ट किया था कि राज्य में पहले से संचालित मदरसे केवल नए सिस्टम के कारण स्वतः बंद नहीं होंगे। उन्हें निर्धारित शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत मान्यता हासिल करनी होगी। इसका उद्देश्य मदरसों को व्यापक शिक्षा व्यवस्था के साथ जोड़ना और उनमें शैक्षणिक मानकों को मजबूत करना बताया गया है।
आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक पहचान भी रहेगी
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धाकाते ने कहा कि नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है। इसके साथ ही उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की बात भी कही गई है।
सरकार की ओर से यह व्यवस्था इस सोच के साथ आगे बढ़ाई जा रही है कि बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा के जरूरी विषयों और आधुनिक कौशल का लाभ मिले। इसके लिए संस्थानों को निर्धारित Academic Standards और Regulations का पालन करना होगा।
Uttarakhand Minority Education: मदरसा संचालकों ने हाईकोर्ट का रुख किया
नए Minority Education System को लेकर कुछ मदरसा संचालकों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं की दलील है कि Minority Education Authority और Education Board से अनिवार्य मान्यता लेने की व्यवस्था से कई मदरसों के संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित बताई गई है। ऐसे में सरकार की ओर से नए शिक्षा ढांचे का बचाव और इसके उद्देश्यों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।
CM Dhami ने कहा- सभी बच्चों को समान अवसर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने Minority Educational Institutions को Recognition Certificates देते हुए कहा कि सरकार की नीतियां बिना भेदभाव सभी को समान अवसर देने पर केंद्रित हैं। उनका कहना है कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो बच्चों के व्यक्तित्व विकास, करियर निर्माण और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की क्षमता विकसित करे।
धामी ने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग और सुधार किए जा रहे हैं। 26 संस्थानों को मान्यता दिया जाना इसी दिशा में एक नई शुरुआत है।
26 संस्थानों की मान्यता और मदरसों पर कार्रवाई का क्या संदेश?
एक ही समय में 26 संस्थानों को मान्यता देना और नियमों का पालन नहीं करने वाले मदरसों पर कार्रवाई करना सरकार की नीति का दोहरा पक्ष सामने रखता है। सरकार मान्यता की प्रक्रिया पूरी करने वाले संस्थानों को व्यवस्था में शामिल कर रही है, जबकि आवश्यक Recognition और दस्तावेज नहीं रखने वाले संस्थानों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
इसका उद्देश्य Minority Education को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और निर्धारित शैक्षणिक मानकों के अनुरूप बनाना बताया जा रहा है।
आगे और तेज हो सकता है निरीक्षण अभियान
बाजपुर में कार्रवाई के बाद अब अन्य क्षेत्रों में भी मदरसों के निरीक्षण को लेकर निगाहें टिक गई हैं। प्रशासन पहले से ही जिले में जांच अभियान चला रहा है। ऐसे में जिन संस्थानों ने अभी तक आवश्यक Recognition या दस्तावेज पूरे नहीं किए हैं, उनके लिए आने वाले दिनों में प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण होगा।
वहीं हाईकोर्ट में नए सिस्टम को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई भी इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।
उत्तराखंड में Minority Education को लेकर सरकार ने एक ओर 26 संस्थानों को मान्यता देकर नए सिस्टम में शामिल किया है, तो दूसरी ओर बिना आवश्यक दस्तावेजों के चल रहे मदरसों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में मान्यता प्रक्रिया, निरीक्षण अभियान और हाईकोर्ट की सुनवाई के बीच यह मुद्दा राज्य की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बना रह सकता है।







