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उत्तराखंड में हाइब्रिड कारों को टैक्स छूट देने का फैसला अटका, ऑटो कंपनियों के विरोध के बाद सरकार कर रही पुनर्विचार

On: July 10, 2025 7:08 AM
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उत्तराखंड सरकार द्वारा हाइब्रिड कारों को वाहन कर में सौ फीसदी छूट देने का निर्णय फिलहाल अटक गया है। इस फैसले के खिलाफ प्रमुख भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों ने आपत्ति जताई है, जिसके चलते सरकार अब इस नीति पर दोबारा विचार कर रही है।

प्रदेश सरकार ने जून माह के पहले सप्ताह में उत्तराखंड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम के तहत केंद्रीय मोटरयान (9वां संशोधन) नियम 2023 के नियम 125-एम के अंतर्गत प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कार और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कारों को वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट देने का निर्णय लिया था। यह छूट वित्तीय वर्ष 2025-26 तक प्रभावी रहने वाली थी।

सरकार का उद्देश्य था कि उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी वाहन कर छूट देकर हाइब्रिड कारों का पंजीकरण राज्य में ही किया जाए, जिससे राज्य को जीएसटी के रूप में 28 से 43 प्रतिशत तक राजस्व मिल सके। हालांकि वाहन कर का नुकसान होता, लेकिन पंजीकरण यहीं होने से राज्य को कुल मिलाकर फायदा मिलने की संभावना थी।

टाटा और महिंद्रा ने जताई आपत्ति

इस फैसले के विरोध में देश की प्रमुख ऑटो कंपनियां टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा सामने आई हैं। इन कंपनियों का कहना है कि उनके पोर्टफोलियो में हाइब्रिड कारें नहीं हैं और राज्य सरकार का यह फैसला बाजार में असंतुलन पैदा करेगा। कंपनियों के मुताबिक, इस निर्णय से टोयोटा, मारुति और होंडा जैसी कंपनियों की हाइब्रिड कारों की मांग बढ़ेगी, जबकि उनकी इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री पर असर पड़ेगा।

टाटा और महिंद्रा ने राज्य में किए गए अपने निवेश का हवाला देते हुए सरकार को बताया कि इस निर्णय से उनके व्यापारिक हित प्रभावित होंगे। कंपनियों के इस तर्क को सरकार ने गंभीरता से लिया है और अब इस नीति पर पुनर्विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार आने वाले समय में इस फैसले को रद्द करने का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष ला सकती है। फिलहाल इस पर मंथन जारी है।

परिवहन विभाग ने यह दी थी छूट देने की दलील

परिवहन विभाग के अधिकारियों का तर्क था कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में हाइब्रिड वाहनों को वाहन कर में छूट दी जा रही है, जिसके चलते उत्तराखंड के लोगों द्वारा अपनी हाइब्रिड कारों का पंजीकरण दूसरे राज्यों में कराया जा रहा है। इससे वाहन स्वामियों को तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक का लाभ हो रहा था और उत्तराखंड को वाहन कर का नुकसान उठाना पड़ रहा था।

विभाग के अनुसार, बीते एक वर्ष में उत्तराखंड में केवल 750 हाइब्रिड कारों का पंजीकरण हुआ था, जबकि वाहन कर में छूट मिलने के बाद यह आंकड़ा अगले साल 2000 के पार पहुंचने की संभावना थी। विभाग का मानना था कि छूट से राज्य को दीर्घकालिक लाभ होता और हाइब्रिड वाहनों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता।

फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं

फिलहाल सरकार कंपनियों के विरोध और राज्य के आर्थिक हितों को देखते हुए इस निर्णय पर आगे की रणनीति बना रही है। कैबिनेट की आगामी बैठक में इस फैसले को वापस लेने या संशोधित रूप में लागू करने पर कोई अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।


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