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उत्तराखंड सहकारिता मंत्री ने की समीक्षा बैठक, दिए निर्देश – प्रत्येक सहकारी बैंक शाखा में 5000 नए खाते खोलने व 30 करोड़ रुपये जमा करने होंगे अनिवार्य

On: September 6, 2025 6:45 AM
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उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य व जिला सहकारी बैंकों की समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। बैठक का उद्देश्य सहकारी बैंकों की प्रगति का मूल्यांकन करना, आगामी योजनाओं पर चर्चा करना और उन्हें अधिक प्रभावी व जनसामान्य तक पहुंच बनाने के लिए दिशा निर्देश देना था। मंत्री ने प्रत्येक शाखा में 5000 नए खाते खोलने और 30 करोड़ रुपये जमा करने का अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित किया। इसके साथ ही, 1 अक्टूबर से ऑनलाइन सदस्यता अभियान शुरू किया जाएगा, जिसका लक्ष्य एक लाख नए सदस्य जोड़ना रखा गया है।

नए खाते व जमा राशि बढ़ाने के निर्देश

डा. धन सिंह रावत ने सभी सहकारी बैंक शाखा प्रबंधकों को यह जिम्मेदारी दी कि वे निर्धारित लक्ष्य को गंभीरता से लें। प्रत्येक शाखा में कम से कम 5000 नए खाते खोलना और 30 करोड़ रुपये का न्यूनतम डिपाजिट सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई शाखा इन लक्ष्यों की प्राप्ति में असफल रहती है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सहकारी बैंकों की भूमिका को और प्रभावी बनाने के लिए आमजन तक उनकी पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके लिए एक अक्टूबर से पूरे प्रदेश में ऑनलाइन सदस्यता अभियान चलाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग सहकारी बैंक से जुड़ सकें और लाभ उठा सकें।

सामाजिक क्षेत्र में भी बढ़ाएं योगदान

सहकारिता मंत्री ने स्पष्ट किया कि सहकारी बैंक केवल वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि समाज के उत्थान में भी अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने सभी शाखाओं को निर्देश दिए कि वे अस्पतालों के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराएं, सरकारी स्कूल भवन निर्माण में सहायता करें, तथा अन्य सामाजिक कार्यों में योगदान दें। मंत्री ने कहा कि यह कदम सहकारी संस्थाओं की सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करेगा और लोगों के बीच सहकारी व्यवस्था की उपयोगिता बढ़ेगी।

घाटे में चल रही शाखाओं पर नाराजगी

डा. धन सिंह रावत ने हरिद्वार, गोपेश्वर, खटीमा और बाजपुर में घाटे में चल रही सहकारी बैंक शाखाओं की स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन शाखाओं को लाभ में लाने के लिए ठोस रणनीति बनाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। आगामी श्रीनगर समीक्षा बैठक में इन शाखाओं के प्रबंधकों को अपनी कार्ययोजना और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी अनिवार्य होगी।
बैठक में उत्तरकाशी शाखा के प्रबंधक इंद्रजीत सिंह व काशीपुर शाखा के प्रबंधक मनोज बिष्ट ने बताया कि उनकी शाखाएं इस वर्ष लाभ में काम कर रही हैं, जिससे अच्छा संदेश मिला।

गैर निष्पादित आस्तियों (NPA) पर नियंत्रण के निर्देश

प्रबंध निदेशक प्रदीप मेहरोत्रा ने सभी शाखाओं को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे खर्च में कटौती करें, सुरक्षित ऋण प्रदान करें, जमा राशि बढ़ाएं और एनपीए (Non-Performing Assets) को कम करने पर विशेष ध्यान दें। इसके लिए शाखाओं को ठोस कार्ययोजना बनानी होगी। एनपीए की वसूली व नियंत्रण के लिए भी विशेष रणनीति बनाई जाएगी ताकि बैंक अधिक सुदृढ़ बने।

अनुपयुक्त स्थानों पर शाखाओं का स्थानांतरण

सहकारिता मंत्री ने राज्य में अनुपयुक्त स्थानों पर चल रही बैंक शाखाओं के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने के आदेश दिए। यह कमेटी समय-समय पर इन शाखाओं का आकलन करेगी और उपयुक्त स्थानों का चयन कर उन्हें स्थानांतरित करने की सिफारिश करेगी।
साथ ही, उन्होंने राज्य सहकारी बैंक की कारपोरेट शाखा का नाम बदलने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि वर्तमान में यह शाखा अपने उद्देश्य के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है, इसलिए इसका नामकरण बदलकर अधिक प्रभावी व उद्देश्य अनुरूप बनाना आवश्यक है।

निष्कर्ष

सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की यह समीक्षा बैठक सहकारी बैंकों को न केवल वित्तीय मजबूती प्रदान करने का बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाएगी। निर्धारित लक्ष्य पूरे न किए जाने पर कड़ी कार्रवाई का निर्णय, घाटे में चल रही शाखाओं को लाभ में लाने की कार्ययोजना, ऑनलाइन सदस्यता अभियान व सामाजिक कार्यों में बढ़ता योगदान सहकारी बैंकों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह व सशक्त बनायेगा।

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