Uttarakhand Census 2026 को लेकर राज्य में तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही हैं। पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण में व्यक्तिगत जनगणना की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। विशेष रूप से उत्तराखंड के बर्फ से ढके दुर्गम क्षेत्रों यानी स्नो बाउंड इलाकों में 25 अगस्त 2026 से जनगणना शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में भारत के महापंजीयक कार्यालय (ORGI) की अंतिम अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
राज्य सरकार और जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार, प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत स्नो बाउंड क्षेत्रों में 25 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक व्यक्तिगत जनगणना कराई जा सकती है। इसके लिए जुलाई के अंतिम सप्ताह से अधिकारियों, सुपरवाइजरों और प्रगणकों का प्रशिक्षण भी शुरू किया जाएगा, ताकि निर्धारित समय पर पूरी प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके।
131 गांव और 3 नगर पंचायतें होंगी शामिल
Uttarakhand Census 2026 के दूसरे चरण में प्रदेश के चार पर्वतीय जिलों के 131 गांव और तीन नगर पंचायतों को शामिल किया गया है। ये सभी क्षेत्र वर्ष के अधिकांश समय बर्फ से ढके रहते हैं, इसलिए यहां सामान्य समय से अलग अवधि में जनगणना कराई जाती है।
इन क्षेत्रों का विवरण इस प्रकार है:
- उत्तरकाशी जिले के 69 गांव और गंगोत्री नगर पंचायत।
- चमोली जिले के 23 गांव और बदरीनाथ नगर पंचायत।
- रुद्रप्रयाग जिले के 4 गांव और केदारनाथ नगर पंचायत।
- पिथौरागढ़ जिले के 35 गांव।
इन इलाकों तक पहुंचना मौसम के कारण चुनौतीपूर्ण रहता है। इसी वजह से स्नो बाउंड क्षेत्रों के लिए अलग से जनगणना कार्यक्रम तैयार किया जाता है, जिससे प्रत्येक नागरिक का सही और समयबद्ध रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
पहले चरण में पूरा हुआ मकान सूचीकरण
राज्य में जनगणना के पहले चरण के अंतर्गत 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य पूरा किया गया। इस दौरान प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में घरों, परिवारों और भवनों से संबंधित विस्तृत आंकड़े एकत्र किए गए।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में परिवारों की संख्या अब 28.3 लाख से अधिक हो चुकी है। वर्ष 2011 की तुलना में पिछले 15 वर्षों में लगभग 8.18 लाख नए परिवार जुड़े हैं। इसी अवधि में प्रदेश की अनुमानित आबादी भी लगभग 1.01 करोड़ से बढ़कर 1.27 करोड़ के पार पहुंच गई है। यानी राज्य की जनसंख्या में करीब 26 लाख लोगों की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा प्रदेश में आवासीय और गैर-आवासीय भवनों की संख्या भी बढ़कर लगभग 45 लाख तक पहुंच चुकी है, जो तेजी से हो रहे शहरीकरण और विकास को दर्शाती है।
अगले सप्ताह से शुरू होगी प्रशिक्षण प्रक्रिया
Uttarakhand Census 2026 को सफल बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तय कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार जुलाई के अंतिम सप्ताह से राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों, चार्ज अधिकारियों, सुपरवाइजरों और प्रगणकों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा।
निदेशालय का लक्ष्य है कि 21 अगस्त तक सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया जाए, ताकि 25 अगस्त से बिना किसी बाधा के व्यक्तिगत जनगणना शुरू हो सके।
200 प्रगणक और सुपरवाइजर होंगे तैनात
जनगणना निदेशालय के अनुसार स्नो बाउंड क्षेत्रों में लगभग 200 प्रगणक और सुपरवाइजर नियुक्त किए जाएंगे। इन कर्मचारियों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में कार्य करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि प्रत्येक गांव और नगर पंचायत में घर-घर जाकर नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी साधनों और निर्धारित मानकों का पालन किया जाएगा ताकि आंकड़ों की शुद्धता बनी रहे।
ORGI की अधिसूचना का इंतजार
हालांकि तैयारियां लगभग पूरी हैं, लेकिन Uttarakhand Census 2026 की औपचारिक शुरुआत भारत के महापंजीयक कार्यालय (Office of the Registrar General of India) की अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगी।
जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार व्यक्तिगत गणना के लिए प्रश्नावली तैयार की जा चुकी है। हाल ही में हरिद्वार जिले में इसका प्री-टेस्ट भी किया गया है। यदि आवश्यक हुआ तो अंतिम अधिसूचना से पहले कुछ प्रश्नों में बदलाव किया जा सकता है। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद पूरी प्रश्नावली सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध करा दी जाएगी।
विकास योजनाओं के लिए अहम होगी यह जनगणना
विशेषज्ञों का मानना है कि Uttarakhand Census 2026 केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की सरकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी साबित होगी।
विशेष रूप से दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों के सटीक आंकड़े मिलने से सरकार वहां की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार कर सकेगी। इससे संसाधनों का बेहतर वितरण होगा और सीमांत क्षेत्रों के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि हर नागरिक का सही रिकॉर्ड तैयार किया जाए और कोई भी परिवार जनगणना से वंचित न रहे। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक मशीनरी पूरी तैयारी के साथ दूसरे चरण की शुरुआत करने जा रही है।








