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उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने दोहरी मतदाता सूची वाले प्रत्याशियों पर रोक के आदेश में संशोधन से किया इनकार, कहा – केवल सर्कुलर पर लगाई गई है रोक

On: July 14, 2025 10:58 AM
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नैनीताल उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि उसने चुनाव प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई है, बल्कि केवल राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 6 जुलाई को जारी किए गए सर्कुलर को निलंबित किया है। न्यायालय ने दोहरी मतदाता सूची में शामिल प्रत्याशियों को लेकर अपने पूर्व आदेश में बदलाव करने से इंकार कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल उस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की, जिसमें आयोग ने अदालत से अपने 11 जुलाई के आदेश को स्पष्ट करने की गुहार लगाई थी। आयोग ने दावा किया कि कोर्ट के निर्णय से पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई है और संसाधनों का भारी खर्च पहले ही किया जा चुका है।

हालांकि, अदालत ने मौखिक रूप से स्पष्ट कर दिया कि उसने केवल आयोग के 6 जुलाई के सर्कुलर को निरस्त किया है, न कि पूरी चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई है। न्यायालय ने यह भी कहा कि पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत चुनावी प्रावधानों के अनुपालन की जिम्मेदारी स्वयं आयोग की है।

राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट ने जानकारी दी कि अब कोर्ट की स्थिति स्पष्ट हो जाने के बाद चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कोई कानूनी बाधा नहीं रह गई है।

इससे पहले आयोग ने रविवार को एक प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश के कारण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, और यदि प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो पंचायत चुनावों को समय पर कराना मुश्किल हो जाएगा।

यह पूरा मामला रुद्रप्रयाग निवासी सतेंद्र सिंह बर्थवाल की ओर से दाखिल जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने पंचायत राज अधिनियम की धारा 9(6) का हवाला देते हुए दोहरी मतदाता सूची वाले प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि अधिनियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति दो अलग-अलग मतदाता सूचियों (ग्रामीण और शहरी) में नाम होने की स्थिति में पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता।

आयोग ने नियमों की अवहेलना करते हुए एक सर्कुलर जारी कर ऐसे प्रत्याशियों के नामांकन स्वीकार करने की अनुमति दी थी, जिसके बाद प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में रिटर्निंग अधिकारियों ने अलग-अलग निर्णय लिए – कहीं ऐसे नामांकन पत्र खारिज हुए, तो कहीं स्वीकृत।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने बताया कि कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में कोई बदलाव नहीं किया है और अब अधिकारिक आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है।

यह मामला आने वाले पंचायत चुनावों में प्रत्याशियों की वैधता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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