उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने होली के पावन अवसर पर राज्य के लाखों सरकारी सेवकों, पेंशनभोगियों और संविदा कर्मियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के इस निर्देश के बाद प्रदेश के प्रशासनिक और वित्तीय गलियारों में सक्रियता बढ़ गई है, क्योंकि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि त्योहार की खुशियों में कोई वित्तीय बाधा आड़े न आए। इस निर्णय के केंद्र में वे लाखों परिवार हैं जो अपनी मासिक आय के लिए सरकारी खजाने पर निर्भर हैं। सामान्य परिस्थितियों में सरकारी कर्मचारियों का वेतन और पेंशनर्स की राशि अगले माह की शुरुआती तारीखों में उनके खातों में आती है, लेकिन इस बार मार्च के प्रथम सप्ताह में होली पड़ने के कारण मुख्यमंत्री ने परंपरा से हटकर समय से पहले भुगतान का आदेश दिया है।
इस घोषणा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी व्यापकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ केवल स्थायी या नियमित श्रेणी के अधिकारियों और कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। शासन की प्राथमिकता सूची में वे आउटसोर्सिंग कर्मचारी, संविदा कर्मी और विशेष रूप से सफाईकर्मी भी शामिल हैं, जो अक्सर भुगतान की लंबी प्रक्रियाओं के कारण त्योहारों पर उपेक्षित रह जाते थे। योगी सरकार का यह कदम दर्शाता है कि सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक न्याय की पहुंच पिरामिड के सबसे निचले स्तर तक होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि भुगतान की इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर हीलाहवाली या तकनीकी बहानेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके लिए वित्त विभाग ने औपचारिक शासनादेश जारी करते हुए 28 फरवरी तक हर हाल में धनराशि का हस्तांतरण सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।
प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य को युद्धस्तर पर पूरा करने के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्थाएं भी की हैं। ट्रेजरी और बैंकों के कामकाज में कोई रुकावट न आए, इसके लिए शनिवार को भी कार्यदिवस घोषित किया गया है। यह निर्णय इसलिए भी आवश्यक था क्योंकि डिजिटल सिग्नेचर, बिलिंग क्लीयरेंस और डेटा अपडेशन जैसे कार्यों में समय लगता है। सरकारी कार्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अतिरिक्त समय देकर अपनी सभी औपचारिकताएं पूरी करें ताकि बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से पैसा समय पर गंतव्य तक पहुंच सके। इसके पीछे सरकार की एक दूरदर्शी सोच यह भी है कि यदि कर्मचारियों के हाथ में समय से पैसा होगा, तो वे त्योहार की खरीदारी निश्चिंत होकर कर पाएंगे, जिससे बाजार में तरलता बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
होली के अवकाश को लेकर भी सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। इस वर्ष 2 मार्च से 4 मार्च तक कुल तीन दिनों का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है, जिसमें 3 मार्च को मुख्य होली का पर्व मनाया जाएगा। चूंकि मार्च के शुरुआती दिनों में लगातार छुट्टियां पड़ रही हैं, इसलिए यदि वेतन 28 फरवरी तक नहीं आता, तो कर्मचारियों को त्योहार के बाद ही पैसा मिल पाता, जिससे उनके उत्सव का रंग फीका पड़ सकता था। मुख्यमंत्री की इस “प्रो-एम्प्लॉई” नीति ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के बीच खुशी की लहर पैदा कर दी है। संगठनों का मानना है कि यह केवल एक वित्तीय लेन-देन नहीं है, बल्कि सरकार की अपने कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का प्रतीक है।
निष्कर्षतः, योगी आदित्यनाथ का यह फैसला न केवल शासन की कुशलता को दर्शाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रदेश का नेतृत्व अपने हर छोटे-बड़े कर्मचारी के साथ खड़ा है। एक ऐसे समय में जब मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए महंगाई एक चुनौती होती है, समय से पहले मिली यह आर्थिक मदद किसी बड़े उपहार से कम नहीं है। यह कदम प्रशासनिक दक्षता, समयबद्ध कार्यशैली और लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को पुख्ता करता है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्णय से राज्य के लाखों घरों में होली का उत्साह दोगुना हो गया है, जिससे कर्मचारी अब बिना किसी मानसिक या वित्तीय तनाव के अपने परिजनों के साथ रंगों का यह पर्व हर्षोल्लास से मना सकेंगे।
यूपी के सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: होली से पहले आएगा फरवरी का वेतन, सीएम योगी का सख्त निर्देश
On: February 27, 2026 8:09 AM











