देश के सबसे दुर्गम और खतरनाक नक्सली गढ़ों में से एक, छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में सुरक्षाबलों ने अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन अंजाम दिया है। भीषण गर्मी और घने जंगलों के बीच तीन सप्ताह तक चले इस अभियान में सुरक्षा बलों के 10,000 से अधिक जवानों ने नक्सलियों की मजबूत पकड़ को पूरी तरह तोड़ दिया। इस ऑपरेशन को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक “ऐतिहासिक जीत” करार दिया और दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर में घायल जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया।
कर्रेगुट्टा की पहाड़ियां कभी नक्सलियों की सबसे ख़तरनाक यूनिट, बटालियन नंबर वन की शरणस्थली थीं। लेकिन इस ऑपरेशन में न केवल 31 नक्सलियों को मार गिराया गया, जिनमें 15 महिलाएं शामिल थीं, बल्कि उनका अस्त्र-शस्त्र और सप्लाई सिस्टम भी तहस-नहस कर दिया गया। इन मारे गए नक्सलियों में से अधिकांश पर करोड़ों रुपये के इनाम घोषित थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सुरक्षा बलों को नक्सलियों की सबसे बड़ी अवैध हथियार फैक्टरी का पता चला, जिसे मौके पर ही ध्वस्त कर दिया गया।
इस ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, इंसास राइफलें, SLR, माउज़र, .303 राइफलें, भारी मात्रा में गोलियां और विस्फोटकों से जुड़ी सामग्री बरामद की। नक्सलियों ने ये हथियार दो वर्षों में जमा किए थे, ताकि लंबे समय तक प्रतिरोध कर सकें, लेकिन जब सुरक्षाबलों ने निर्णायक हमला बोला, तो वे या तो मारे गए या भाग खड़े हुए। इस अभियान ने नक्सलवाद की रीढ़ को न केवल तोड़ा है, बल्कि उसकी हिंसा को पोषण देने वाले पूरे नेटवर्क को भी खत्म कर दिया है।
कर्रेगुट्टा में यह जीत सिर्फ़ एक सैन्य उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह नक्सलियों की उस सोच का भी अंत है जो दशकों से देश के भीतर एक समानांतर सत्ता स्थापित करने की कोशिश में लगी थी। यह ऑपरेशन दिखाता है कि अब नक्सलवाद गिन-गिन कर अपनी अंतिम सांसें ले रहा है, और भारत की सुरक्षा व्यवस्था हर चुनौती को खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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