देहरादून में फ्लैट दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले पुष्पांजलि इंफ्राटेक के डायरेक्टर दीपक मित्तल पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज़ हो गई है। गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो मित्तल और उसके सहयोगियों द्वारा अर्जित की गई संपत्तियों की गहराई से जांच करेगी। मित्तल पर आरोप है कि उसने करीब 90 फ्लैट खरीदारों से 45 करोड़ रुपये हड़पे और फरार हो गया।
SIT की अगुवाई एक आईपीएस अधिकारी कर रहे हैं, जिनकी टीम में निरीक्षक, उपनिरीक्षक और केस से जुड़े विवेचक शामिल किए गए हैं। यह टीम न केवल मित्तल की संपत्तियों की बिक्री और ट्रांसफर की जांच करेगी, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किन पूर्व अधिकारियों की मिलीभगत से यह घोटाला संभव हुआ। सूत्रों के मुताबिक, दीपक मित्तल फरारी के दौरान भी कुछ महीनों पहले देहरादून आया था और अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें उनकी रकम लौटाकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की।
चौंकाने वाली बात यह है कि मित्तल ने अपनी करोड़ों की संपत्तियां फरार होने से पहले रिश्तेदारों और करीबियों के नाम कर दी थीं। कुछ विक्रय विलेख ऐसे हैं, जिनमें भुगतान की कोई पुष्टि ही नहीं की गई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सामने आया है कि उसने अपना 20 करोड़ का बंगला महज 5 करोड़ में बेच दिया, ताकि उसे ईडी की जब्ती कार्रवाई से बचाया जा सके। यह दर्शाता है कि मित्तल पहले से ही योजना बनाकर निकला था।
अब जब SIT पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है, तो यह संभावना जताई जा रही है कि कुछ रसूखदार नाम भी सामने आ सकते हैं। यदि जांच निष्पक्ष और सख्ती से की गई, तो न सिर्फ निवेशकों को न्याय मिलेगा, बल्कि सिस्टम में छिपे उन चेहरों का भी पर्दाफाश होगा, जिन्होंने मित्तल की मदद कर अपना हित साधा।
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