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कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर 5.0 रही तीव्रता

On: February 27, 2026 9:03 AM
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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत समूचे दक्षिण बंगाल में शुक्रवार की दोपहर प्राकृतिक आपदा के साये में बीती। दोपहर करीब 1 बजकर 22 मिनट पर जब जनजीवन अपनी पूरी रफ्तार में था, अचानक धरती डोलने लगी और देखते ही देखते चारों ओर दहशत फैल गई। भूकंप के झटके इतने तीव्र थे कि बहुमंजिला इमारतों में बैठे लोगों को अपनी मेज-कुर्सियां और बिजली के पंखे तेजी से हिलते महसूस हुए। झटकों के साथ ही सायरन और लोगों के चिल्लाने की आवाजें सुनाई देने लगीं। महानगर के डलहौजी, साल्ट लेक और पार्क स्ट्रीट जैसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में दफ्तरों को तुरंत खाली करा लिया गया। हजारों की संख्या में कर्मचारी और आम नागरिक लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों की ओर भागे और खुले आसमान के नीचे सड़कों पर जमा हो गए।
वैज्ञानिक आंकड़ों की बात करें तो भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी है। हालांकि, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने इसे 5.3 के करीब बताया है। भूकंप का केंद्र पड़ोसी देश बांग्लादेश का खुलना जिला था, जो पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाके टाकी से महज 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। केंद्र के इतना करीब होने के कारण कोलकाता और आसपास के जिलों में इसकी लहरें बहुत प्रभावशाली रहीं। कुछ सेकंड तक चली इस हलचल ने न केवल आवासीय इलाकों बल्कि बाजारों में भी अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। दुकानदार और ग्राहक सब कुछ छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ पड़े। कोलकाता के अतिरिक्त हावड़ा, हुगली, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर जैसे जिलों से भी इसी तरह की तस्वीरें सामने आईं, जहां जिला मुख्यालयों और अदालतों में काम रुक गया और लोग मैदानों में आकर खड़े हो गए।
महानगर के कई हिस्सों से डरावनी खबरें भी आईं। कई पुरानी और जर्जर इमारतों में रहने वाले लोगों ने दावा किया कि झटकों के दौरान उनकी दीवारें हिल रही थीं और कुछ स्थानों पर इमारतों के हल्का झुकने की अपुष्ट सूचनाएं भी मिलीं। हालांकि, प्रशासन ने राहत की सांस तब ली जब प्रारंभिक रिपोर्टों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान या बड़ी संरचना के गिरने की पुष्टि नहीं हुई। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने तुरंत टीमों को सतर्क कर दिया और नगर निगम के अधिकारियों को पुरानी इमारतों की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए। सोशल मीडिया पर भी कंपन के दौरान पंखों और अलमारियों के हिलने के दर्जनों वीडियो वायरल होने लगे, जो इस बात की तस्दीक कर रहे थे कि झटके मामूली नहीं थे।
दिलचस्प और चिंताजनक बात यह है कि बंगाल के साथ-साथ हिमालयी राज्य सिक्किम भी आज भूकंप की चपेट में रहा। वहां शुक्रवार तड़के सुबह करीब 4 बजकर 10 मिनट पर 3.7 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे। हालांकि इसकी तीव्रता बंगाल के भूकंप से कम थी, लेकिन इसने वहां के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। पश्चिम सिक्किम के दो प्रमुख स्कूलों—टाशीडिंग के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय और गेरेथांग जूनियर हाईस्कूल—की दीवारों पर लंबी दरारें पड़ गईं और कुछ कक्षाओं की सीलिंग भी नीचे गिर गई। गनीमत रही कि भूकंप तड़के सुबह आया था, अन्यथा स्कूल में बच्चों की मौजूदगी से कोई बड़ा हादसा हो सकता था। सिक्किम में लगातार दूसरे दिन भूकंप आने से पहाड़ों पर रहने वाले लोग काफी डरे हुए हैं।
बंगाल और सिक्किम की इन घटनाओं ने एक बार फिर पूर्वी भारत की भौगोलिक संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश और हिमालयी बेल्ट में होने वाली हलचल सीधे तौर पर इन क्षेत्रों को प्रभावित करती है। फिलहाल कोलकाता और दक्षिण बंगाल में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन लोग अभी भी किसी ‘आफ्टरशॉक’ की आशंका से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और भूकंप की स्थिति में सुरक्षित रहने के मानकों का पालन करें।

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