अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

देहरादून में सुभारती कॉलेज के खिलाफ सख्त कार्रवाई, 87.50 करोड़ रुपये की बकाया वसूली का कुर्की वारंट जारी

On: December 14, 2025 7:44 AM
Follow Us:

देहरादून जिला प्रशासन ने सुभारती समूह के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए 87.50 करोड़ रुपये की बकाया राजस्व वसूली के लिए कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। बार-बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद बकाया राशि जमा न किए जाने पर प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है।
जिले में बड़े बकायेदारों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष वसूली अभियान के अंतर्गत यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजस्व की वसूली में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे बकायेदार बड़ा हो या छोटा।
प्रशासन के अनुसार, सुभारती समूह द्वारा छात्रों से पूर्ण शुल्क वसूलने के बावजूद वर्षों तक संरचना विहीन संस्थान में पढ़ाए जाने का मामला गंभीर है। इसी को आधार बनाते हुए राजस्व वसूली वारंट जारी किया गया है। आने वाले दिनों में संस्थान के बैंक खाते सीज करने और संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई भी की जा सकती है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने तहसील क्षेत्रों में ऐसे सभी बकायेदारों की सूची तैयार करें, जिन्होंने लंबे समय से देय राजस्व का भुगतान नहीं किया है या जानबूझकर भुगतान से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में विशेष वसूली अभियान चलाकर शीघ्र वसूली सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने सख्त शब्दों में कहा कि “जनता के धन की लूट करने वालों को किसी भी स्थिति में छोड़ा नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी धन की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें कोई समझौता नहीं होगा।
प्रकरण के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2017-18 में प्रवेश पाए द्वितीय बैच के 74 छात्रों द्वारा उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई थी। छात्रों ने आरोप लगाया था कि संस्थान में आवश्यक संरचना उपलब्ध नहीं है, जिससे वे नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। इस याचिका में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा भी तथ्य प्रस्तुत किए गए थे।
वर्ष 2019 में माननीय उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि संबंधित 300 छात्रों को राज्य के तीन राजकीय मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि इन छात्रों से केवल वही फीस ली जाएगी, जो राजकीय मेडिकल कॉलेजों में लागू है। इस आदेश की पुनः पुष्टि 12 अप्रैल 2019 को की गई थी।
इन छात्रों को राजकीय मेडिकल कॉलेजों में समायोजित करने के लिए लगभग एक नए मेडिकल कॉलेज के समकक्ष संरचना विकसित करनी पड़ी, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त और अप्रत्याशित वित्तीय भार पड़ा। जबकि दूसरी ओर, संबंधित संस्थान द्वारा इन छात्रों से वर्षों तक पूर्ण शुल्क वसूल किया गया, बिना किसी समुचित शैक्षणिक व्यवस्था के।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर संस्थान से पूर्ण राजस्व वसूली की सिफारिश की थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
जिलाधिकारी ने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वसूली की दैनिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें, बड़े बकायेदारों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करें और आवश्यकता पड़ने पर कुर्की, बैंक खाता सीज करने या अन्य विधिक उपायों को तत्काल अमल में लाएं।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए जनता की मेहनत की कमाई से एकत्रित धन अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में राजस्व हानि किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। प्रशासन का यह कदम जनपद में सख्त संदेश देने के साथ-साथ राजस्व वसूली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment