पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एक आध्यात्मिक यात्रा पर अपनी पत्नी सविता कोविंद और बेटी स्वाति कोविंद के साथ परमार्थ निकेतन आश्रम पहुँचे। ऋषिकेश की पावन धरती पर गंगा तट पर उन्होंने गंगा पूजन और आरती में भाग लिया। आश्रम में ऋषिकुमारों ने वेदमंत्रों, शंखध्वनि और पुष्प वर्षा से उनका भव्य स्वागत किया, जिससे पूरा परिसर एक दिव्य अनुभूति से भर उठा।
आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने रामनाथ कोविंद को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर उनका अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि कोविंद का जीवन सादगी, समर्पण और उच्च मूल्यों की मिसाल है—एक साधारण गांव से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक की उनकी यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है। यह जीवन दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों में कितना गहरापन और ऊँचाई छुपी है।
गांधी विचारधारा पर चर्चा करते हुए रामनाथ कोविंद ने कहा कि गांधी जी के लिए रामराज्य केवल धार्मिक प्रतीक नहीं था, बल्कि एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था थी जिसमें समानता, न्याय और सम्मान सभी को मिले। उन्होंने कहा कि आज के दौर में भी यह विचार उतना ही प्रासंगिक है जितना आज़ादी की लड़ाई के समय था।
कोविंद ने परमार्थ निकेतन द्वारा चलाए जा रहे गंगा एक्शन परिवार, स्वच्छता और जल संरक्षण अभियानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल विकल्प नहीं, बल्कि वैश्विक आवश्यकता है। परमार्थ निकेतन का यह कार्य न केवल देश के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
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