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Sharda University पर लगे हिंदू विरोधी होने के आरोप, एग्जाम में पूछे ऐसे सवाल की भड़क गए लोग

On: May 7, 2022 11:11 AM
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Sharda University के BA Political Science के इंटरनल एग्जाम से Social Media पर नई बहस शुरू हो गई है। Social Media पर Sharda University पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगा है यहां तक कि BJP के नेता Vikas Pritam Sinha भी इस बहस में शामिल हो चुके हैं उन्होंने BA Political Science के क्वेश्चन पेपर में पूछे गए एक सवाल पर नाराजगी जाहिर की है BJP नेता द्वारा अपने Tweeter में लिखा गया है कि University का नाम Sharda पर कृत्य देखिए की परीक्षा में छात्रों को हिंदुत्व को अनिवार्य रूप से फासी और नाजीवाद के समकक्ष सिद्ध करने के लिए कहा जाता है यह प्रश्न पत्र कथित रूप से किसी मुस्लिम शिक्षक द्वारा बनाया गया है।

जानिए क्या है मामला।

Sharda University में सेशन 2021 व 2022 के मिड टर्म एग्जाम चल रहे हैं शुक्रवार 6 मई 2022 को First Year Students का BA Political Science ऑनर्स सेमेस्टर 2 एग्जाम हुआ इस सब्जेक्ट के क्वेश्चन पेपर के तीन सेक्शन हैं। A और B और C में कुल 8 सवाल पूछे गए। लेकिन छठे सवाल की वजह से पेपर Social Media पर वायरल हो गया स्टूडेंट्स को हिंदुत्व की तुलना फासीवाद या नाजीवाद से करते हुए। अपने विचार रखने के लिए कहा गया।

आखिरकार फासीवाद और नाजीवाद क्या है।

बताया जा रहा है कि फासीवाद और नाजीवाद दो विचारधाराएं है फासीवाद में व्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित होती है वह राज्यों की शक्तियों को सबसे पहले रखा जाता है इसे सीधे और सटीक शब्दों में कहा जाए तो तानाशाही शासन इस विचारधारा का उदय इटली में हुआ था वही नाजीवाद हिटलर की विचारधारा थी इन दोनों में कई समानताएं पाए जाते हैं।

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पेपर बनाने वाली फैकल्टी सस्पेंड।

आपको बता दें कि मामले को तूल पकड़ता देख Sharda University ने तुरंत 3 सदस्य जांच कमेटी बनाई और पेपर बनाने वाले कमेटी को सस्पेंड कर दिया शारदा विश्वविद्यालय की तरफ से आए बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय को खेद है कि ऐसी घटना हुई है जिसमें सामाजिक कलह को भड़काने की क्षमता हो सकती है विश्वविद्यालय हर उस विचारधारा के विरुद्ध है जो हमारी राष्ट्रीय पहचान और संस्कृति को बिगाड़े एक उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में हम सभ्यता के पुनरुद्धार के बड़े मिशन के लिए प्रतिबंध है जो हमारे धर्म परंपरा इतिहास और संस्कृति का सबसे अच्छा उत्साह मनाता है जिसने न केवल भारत के विचार को बल्कि दुनियाभर में मानव विज्ञान के सभी पहलुओं को आकार दिया है।

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