उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना राज्य के विकास और चारधाम यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है। यह रेल लाइन न सिर्फ धार्मिक पर्यटन को बल देगी, बल्कि गढ़वाल क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ेगी। हालांकि, परियोजना में लगातार आ रही तकनीकी चुनौतियाँ, सुरंग निर्माण की जटिलता और प्राकृतिक आपदाओं का असर इस कार्य को निर्धारित समय पर पूरा होने से रोक रहा है।
नई समय-सीमा कितनी है?
परियोजना को पूरा करने का प्रारंभिक लक्ष्य दिसंबर 2026 था, लेकिन लगातार आती बाधाओं के कारण अब इसे बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया गया है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस नई समय-सीमा को अंतिम लक्ष्य माना है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो दिसंबर 2028 तक ट्रेन कर्णप्रयाग पहुँच सकेगी।
टनल निर्माण अब भी बड़ी चुनौती
परियोजना में कुल 16 सुरंगें बननी हैं, जिनमें से अधिकांश का काम पूरा हो चुका है। हालांकि तीन प्रमुख टनलों में लगभग दस किलोमीटर की खुदाई अभी बाकी है। इन टनलों में मुख्य और निकास सुरंगें शामिल हैं, जिनमें कुल छह ब्रेक-थ्रू किए जाने हैं।
ये सुरंगें निम्न क्षेत्रों में स्थित हैं—
• ढालवाला से नीरगड्डू
• कौडियाला से शिवमूर्ति (तीनधारा के निकट)
• नरकोटा से घोलतीर
इनके पूर्ण होने के बाद ही परियोजना अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ पाएगी।
स्टेशनों का निर्माण तेजी पर
परियोजना के तहत कुल 13 रेलवे स्टेशनों का निर्माण होना है। इनमें से दो स्टेशन—
• वीरभद्र
• योगनगरी ऋषिकेश
पहले ही पूरी तरह तैयार होकर संचालन में आ चुके हैं।
अन्य स्टेशनों की स्थिति:
• शिवपुरी और ब्यासी – निर्माण कार्य प्रगति पर
• देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर – तकनीकी टेंडर हो चुके, अब वित्तीय टेंडरों की प्रक्रिया चल रही है
• धारी देवी, तिलनी, घोलतीर, गौचर – लगभग 126 करोड़ की लागत से निर्माण प्रस्तावित
• कर्णप्रयाग स्टेशन – परियोजना का सबसे बड़ा स्टेशन, जहाँ 26 रेल लाइनें बिछाई जाएँगी
परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ
• कुल लागत: लगभग 16,216 करोड़ रुपये
• शुरुआत: वर्ष 2019
• कुल लंबाई: 126 किमी
• टनल लंबाई: 105 किमी (16 सुरंगें)
• सबसे लंबी सुरंग: 14.08 किमी (देवप्रयाग–जनासू)
• सबसे छोटी सुरंग: 200 मीटर (सेवई–कर्णप्रयाग)
• 6 किमी से बड़ी सुरंगें: कुल 11
परियोजना का सामरिक और आर्थिक महत्व
यह रेल लाइन पहाड़ी क्षेत्रों को मैदानी इलाकों से जोड़ेगी, जिससे:
• चारधाम यात्रा अधिक सुरक्षित और तीव्र होगी
• आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी
• पर्वतीय जिलों में रोजगार और परिवहन के नए अवसर बढ़ेंगे
• सामरिक दृष्टि से रणनीतिक स्थानों तक पहुँच आसान होगी
RVNL का बयान
आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक (सिविल) ओ.पी. मालगुड़ी के अनुसार,
परियोजना को हर हाल में दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और सभी पैकेजों में तेजी से कार्य किया जा रहा है। सुरंगों और स्टेशनों के कार्यों को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
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