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Rishikesh Karnaprayag Rail Project: मुआवजे की मांग को लेकर तीन गांवों के ग्रामीणों का आंदोलन तेज, न्यायालय के आदेश के पालन की मांग

On: July 7, 2026 10:07 AM
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Affected villagers protest over compensation in the Rishikesh Karnaprayag Rail Project in Uttarakhand.

उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी Rishikesh Karnaprayag Rail Project एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह परियोजना की प्रगति नहीं, बल्कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन है। टिहरी गढ़वाल के जनासू, खिलगढ़ मल्ला और खिलगढ़ तल्ला गांवों के लोगों ने चार गुना मुआवजा और 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें आज तक निर्धारित प्रतिकर राशि का भुगतान नहीं किया गया। इससे प्रभावित परिवारों में गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि कई वर्षों से वे न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। Rishikesh Karnaprayag Rail Project से जुड़े इस मुआवजा विवाद ने अब प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

भूमि अधिग्रहण के बाद भुगतान का इंतजार

Rishikesh Karnaprayag Rail Project के निर्माण के लिए इन गांवों की कृषि भूमि और अन्य संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने विकास कार्यों में सहयोग करते हुए अपनी जमीन परियोजना के लिए उपलब्ध कराई, लेकिन बदले में उन्हें नियमानुसार मुआवजा नहीं मिला।

उनका दावा है कि न्यायालय ने प्रभावित किसानों को चार गुना प्रतिकर राशि और 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद संबंधित विभाग और परियोजना से जुड़े अधिकारी आदेश का पालन करने में विफल रहे हैं।

उच्च न्यायालय के आदेश के पालन की मांग

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष केवल मुआवजा प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश का सम्मान सुनिश्चित कराने के लिए भी है।

प्रभावित परिवारों के अनुसार Rishikesh Karnaprayag Rail Project के लिए अधिग्रहित भूमि का उचित मूल्य और ब्याज मिलना उनका कानूनी अधिकार है। यदि न्यायालय के आदेशों का भी पालन नहीं होगा, तो आम नागरिकों का कानून पर विश्वास कमजोर होगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय के निर्देशों को तत्काल लागू करते हुए सभी पात्र लोगों को पूरा भुगतान किया जाए।

प्रशासन पर लगाया अनदेखी का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जिला प्रशासन, संबंधित विभागों और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन दिया गया।

उनका कहना है कि Rishikesh Karnaprayag Rail Project के मुआवजा मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। कई ज्ञापन देने और अधिकारियों से मुलाकात करने के बावजूद कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।

इसी कारण अब ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

तीन गांवों के लोग एकजुट होकर कर रहे प्रदर्शन

जनासू, खिलगढ़ मल्ला और खिलगढ़ तल्ला गांवों के ग्रामीण एक मंच पर आकर अपनी मांग उठा रहे हैं। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और स्थानीय नागरिक शामिल हो रहे हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि Rishikesh Karnaprayag Rail Project विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना है और उन्होंने कभी इसका विरोध नहीं किया। लेकिन विकास के नाम पर प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य परियोजना को रोकना नहीं, बल्कि न्यायसंगत मुआवजा प्राप्त करना है।

चार गुना मुआवजा और 12 प्रतिशत ब्याज की मांग

आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग यह है कि सभी प्रभावित किसानों को न्यायालय के आदेश के अनुरूप चार गुना प्रतिकर राशि और 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक भुगतान लंबित रहने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है, जबकि महंगाई और बढ़ती जरूरतों के बीच बिना मुआवजे के जीवनयापन कठिन होता जा रहा है।

Rishikesh Karnaprayag Rail Project के प्रभावितों का मानना है कि ब्याज का भुगतान भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि भुगतान में हुई देरी के कारण उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

आंदोलनकारियों का कहना है कि Rishikesh Karnaprayag Rail Project से जुड़े सभी प्रभावित परिवार एकजुट हैं और आवश्यकता पड़ने पर बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन तथा अन्य लोकतांत्रिक कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन समय रहते समाधान नहीं निकालता है, तो आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

परियोजना का रणनीतिक महत्व

Rishikesh Karnaprayag Rail Project उत्तराखंड की सबसे महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में शामिल है। यह परियोजना ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से रेल मार्ग के माध्यम से जोड़ने का कार्य करेगी।

इस परियोजना के पूरा होने से चारधाम यात्रा, पर्यटन, व्यापार, स्थानीय रोजगार और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में भी यह रेल लाइन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हालांकि परियोजना की सफलता के लिए यह भी जरूरी है कि प्रभावित परिवारों को समय पर उचित मुआवजा मिले और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।

विकास और अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़ी आधारभूत परियोजना में विकास के साथ-साथ प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

Rishikesh Karnaprayag Rail Project जैसी परियोजनाएं राज्य के भविष्य के लिए आवश्यक हैं, लेकिन यदि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को समय पर उचित प्रतिकर नहीं मिलता, तो इससे सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है।

सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए यह जरूरी है कि न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए सभी प्रभावित परिवारों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

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