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“उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में स्थापित होंगे रियल टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन”

On: April 23, 2025 7:37 AM
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देहरादून। वायु प्रदूषण आज के समय की सबसे गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक बन चुका है, और इसमें पीएम 2.5 की भूमिका बेहद खतरनाक मानी जाती है। यह सूक्ष्म कण बायोमास के जलने से उत्पन्न होते हैं और आसानी से इंसानी फेफड़ों तक पहुंचकर स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं। इस खतरे से निपटने और वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।

उत्तराखंड जल्द ही देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जहां के सभी 13 जिलों में कंटीन्यूअस एम्बियंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) स्थापित किए जाएंगे। यह अत्याधुनिक मॉनिटरिंग स्टेशन न केवल पीएम 2.5 बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (VOC) जैसी जहरीली गैसों का रियल टाइम विश्लेषण कर सकेंगे।

रियल टाइम डाटा से समय रहते लिए जा सकेंगे निर्णय

उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि यह पहल राज्य के संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए वायु प्रदूषण के स्तर को पल-पल पर ट्रैक किया जा सकेगा और उसके आधार पर नीति निर्माण में तेजी से बदलाव किया जा सकेगा।

वायु गुणवत्ता बनाए रखना उत्तराखंड के लिए क्यों है जरूरी?

राज्य की भौगोलिक और पारिस्थितिकीय स्थिति अत्यंत नाजुक है। यहां कई नदियों का उद्गम स्थल है, साथ ही जिम कॉर्बेट और राजाजी नेशनल पार्क जैसे जैव विविधता से समृद्ध अभयारण्य भी स्थित हैं। इन सबको प्रदूषण से सुरक्षित रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है।

हर साल गर्मियों में जंगलों में लगने वाली आग न केवल वातावरण में जहरीली गैसों की मात्रा बढ़ा देती है, बल्कि इसका सीधा असर ग्लेशियरों और वन्यजीवों पर भी पड़ता है। इन नए मॉनिटरिंग स्टेशनों के माध्यम से जंगलों में आग के बाद वातावरण में फैली गैसों का सटीक डाटा मिल सकेगा।

पीएम 2.5 पर सख्त निगरानी

भारत सरकार ने पीएम 2.5 के लिए पहले से ही सख्त मानक तय किए हैं। अब उत्तराखंड में इन मानकों के अनुरूप निगरानी करना अधिक प्रभावी हो जाएगा। डॉ. धकाते के अनुसार, यह सिस्टम प्रदूषण से जुड़ी किसी भी स्थिति पर तुरंत अलर्ट देगा, जिससे त्वरित निवारक उपाय करना संभव होगा।

गैसों की मात्रा का मिलेगा सटीक अनुमान

अब तक वनों की आग या अन्य कारणों से निकलने वाली गैसों की मात्रा का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं होता था। लेकिन CAAQMS स्टेशनों की मदद से अब इन गैसों का वैज्ञानिक विश्लेषण और सटीक मात्रा प्राप्त की जा सकेगी। इससे नुकसान के सही आकलन के साथ-साथ समय रहते आवश्यक कार्रवाई करना भी आसान होगा।

पर्यावरणीय नीतियों में लचीलापन लाएगा यह सिस्टम

डॉ. धकाते ने बताया कि वायु प्रदूषण की मॉनिटरिंग से प्राप्त डाटा के आधार पर उत्तराखंड सरकार समय-समय पर अपनी पर्यावरणीय नीतियों में जरूरी बदलाव कर सकेगी। यह प्रणाली न केवल पर्यावरणीय आपदाओं से बचाव में मददगार होगी, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में भी एक ठोस आधार प्रदान करेगी।

देश को दे सकता है दिशा

उत्तराखंड की यह पहल न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकती है। यदि देश के अन्य राज्य भी इस प्रणाली को अपनाएं, तो वायु गुणवत्ता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को एक नई दिशा मिल सकती है।

भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित वातावरण की दिशा में कदम

डॉ. धकाते ने अंत में कहा, “उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। इस प्रयास के माध्यम से न केवल राज्य अपनी अमूल्य धरोहर को संरक्षित कर पाएगा, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण भी सुनिश्चित करेगा।”

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