रामनगर (नैनीताल) – सोमवार को नैनीताल जिले के रामनगर से करीब 22 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-309 पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ। धनगढ़ी नाले के पास बरसाती नाले का जलस्तर घटने का इंतजार कर रहे छह लोगों को एक तेज रफ्तार बस ने कुचल दिया। हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत रामनगर संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।
कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धनगढ़ी नाले के दोनों ओर बरसाती पानी की वजह से वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। कई यात्री पानी का स्तर कम होने का इंतजार कर रहे थे। इन्हीं में छह लोग भी खड़े थे, जो अपने गंतव्य की ओर जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आ रही एक बस ने उन पर जोरदार टक्कर मार दी।
प्रारंभिक जांच में बस के ब्रेक फेल होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि तकनीकी जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस ने बस को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मृतकों की पहचान
हादसे में जान गंवाने वाले दोनों व्यक्ति शिक्षक थे।
- सुरेंद्र सिंह पंवार (53), निवासी गंगोत्री विहार कनियां, रामनगर – हरणा में शिक्षक के रूप में कार्यरत।
- वीरेंद्र शर्मा (42), निवासी मानिला विहार चोरपानी, रामनगर – हरणा में ही शिक्षक के पद पर तैनात।
दोनों रोजाना की तरह घर से हरणा सल्ट में पढ़ाने के लिए जा रहे थे।
घायलों की स्थिति
इस हादसे में चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से तीन भी शिक्षक बताए जा रहे हैं।
- ललित पांडे – मोहान स्थित इंडियन मेडिसिन फार्मास्यूटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IMPCL) में कार्यरत
- सत्य प्रकाश – निवासी जसपुर, शिक्षक
- दीपक शाह – निवासी मालधन, शिक्षक
- सुनील राज – शिक्षक, पौड़ी गढ़वाल/अल्मोड़ा क्षेत्र में कार्यरत
सभी घायलों को स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
प्रशासन और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। तहसीलदार मनीषा मारखान ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर ब्रेक फेल होने की बात सामने आई है, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही सही कारण पता चल सकेगा।
वहीं, इस हादसे ने स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में धनगढ़ी नाले का जलस्तर बढ़ने से हर साल खतरा बना रहता है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। मौत की खबर से मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है।






