हरिद्वार। भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हरिद्वार में कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ केवल एक चुनावी सुधार नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति और प्रशासनिक दक्षता को एक नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस नीति के लागू होने से भारत तेजी से विकास करेगा और आने वाले वर्षों में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा।
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद दो दिवसीय प्रवास पर कनखल स्थित हरिहर आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया और शाम को गंगा आरती में भी भाग लिया।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि उनके नेतृत्व में गठित ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ समिति ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है, जिसे सरकार ने स्वीकार भी कर लिया है। अब यह रिपोर्ट संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष विचाराधीन है। कोविंद ने कहा कि जैसे ही यह प्रणाली लागू होगी, देश की जीडीपी में 1 से 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव होगी, जो आर्थिक दृष्टि से एक बड़ा परिवर्तन होगा।
उन्होंने इस नीति को देश के लिए ट्रांसफॉर्मेशनल करार देते हुए कहा कि यह कदम भारत को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाएगा। कोविंद ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताया है, जिसने जापान को पीछे छोड़ दिया है। अब केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी ही भारत से आगे हैं, लेकिन जल्द ही भारत तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और दूरदर्शिता की प्रशंसा करते हुए कोविंद ने कहा कि देश को उनके रूप में एक ईमानदार, कर्मठ और सतत राष्ट्रसेवा में लगे नेता मिले हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना भी की।
पूर्व राष्ट्रपति के इस बयान ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ केवल एक राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि भारत के उज्जवल आर्थिक भविष्य की कुंजी भी हो सकता है।





