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राजधानी की अधूरी रेल योजनाएं: वर्ल्ड क्लास स्टेशन अब भी दूर की कौड़ी

On: May 19, 2025 2:16 AM
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देश की राजधानी दिल्ली में रेलवे के कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट वर्षों से अधर में लटके हुए हैं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने की योजना बार-बार तैयार की गई, लेकिन आज भी वह केवल कागजों तक ही सीमित है। बिजवासन, आनंद विहार और सफदरजंग जैसे अन्य प्रमुख स्टेशनों के पुनर्विकास की परियोजनाएं भी आगे नहीं बढ़ सकीं। ये सभी योजनाएं रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का वादा करती थीं, लेकिन अब तक ठोस जमीन पर नहीं उतर पाई हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 मई को देशभर में 103 वर्ल्ड क्लास स्टेशनों की सौगात देने जा रहे हैं, जिनमें बीकानेर, नासिक, वडोदरा, भोपाल जैसे स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत आधुनिक सुविधाओं से सजाया गया है। इसके ठीक उलट, दिल्ली जैसे बड़े और व्यस्त शहर की परियोजनाएं उलझनों में फंसकर रह गई हैं। नई दिल्ली स्टेशन को एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस करने के लिए कई बार निविदाएं जारी की गईं, लेकिन कार्य आगे नहीं बढ़ सका।

रेलवे की एक प्रमुख योजना थी कि दिल्ली की ट्रेनों को दिशा के आधार पर विभाजित कर बिजवासन से पश्चिम दिशा और आनंद विहार से पूर्व दिशा की ट्रेनों का संचालन किया जाए। इससे नई दिल्ली स्टेशन पर ट्रैफिक का दबाव कम हो सकता था, लेकिन योजना आज भी अधूरी है। उद्घाटन की कोई तारीख तय नहीं की जा सकी है, जबकि यह चर्चा पिछले दस वर्षों से चल रही है।

दिल्ली में यमुना नदी पर बनने वाला नया रेलवे पुल भी अब तक पूरा नहीं हो सका है। मानसून जल्द ही दस्तक देने वाला है और पुराने लोहे का पुल, जो अब 150 साल से अधिक पुराना हो चुका है, किसी भी समय यातायात के लिए जोखिम बन सकता है। अगर यमुना में इस बार भी जल स्तर बढ़ा, तो यातायात बाधित होना तय है। ऐसे में अधूरी परियोजनाएं सिर्फ विकास के वादों को नहीं, बल्कि राजधानी की बुनियादी ज़रूरतों को भी पीछे छोड़ती नजर आ रही हैं।

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