नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने भारतीय रेल को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के उद्देश्य से 9,072 करोड़ रुपये की तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई। इन योजनाओं का प्राथमिक केंद्र बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्य हैं, जहां रेल नेटवर्क के विस्तार से न केवल यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की गति भी तेज होगी।
इस परियोजना के तहत कुल 307 किलोमीटर नया रेल ट्रैक बिछाया जाएगा, जिससे कनेक्टिविटी का एक नया जाल बिछेगा।
कनेक्टिविटी का महाजाल: 98 लाख लोगों के जीवन में आएगा बदलाव
सरकार का यह फैसला केवल पटरियां बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारने का एक माध्यम है।
- गांवों तक पहुंच: इन परियोजनाओं से चार राज्यों के आठ जिलों के लगभग 5,407 गांवों को सीधा फायदा मिलेगा।
- विशाल आबादी को लाभ: अनुमान है कि इन क्षेत्रों की करीब 98 लाख की आबादी अब सुगम और तेज रेल यात्रा का अनुभव कर सकेगी।
- समय सीमा: सरकार ने इन सभी कार्यों को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे।
तीन प्रमुख रूट्स: जहां खत्म होगी ट्रेनों की लेटलतीफी
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत ये तीनों परियोजनाएं उन रूटों पर केंद्रित हैं जो वर्तमान में ‘बॉटलनेक’ यानी अत्यधिक व्यस्तता का सामना कर रहे हैं।
- बिहार: पुनारख से किऊल (तीसरी और चौथी लाइन)
बिहार में पुनारख से किऊल के बीच रेल मार्ग दिल्ली-हावड़ा मुख्य लाइन का हिस्सा है। वर्तमान में अत्यधिक ट्रैफिक के कारण यात्री ट्रेनों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। तीसरी और चौथी लाइन बनने से यात्री और मालगाड़ियों के लिए अलग-अलग पथ उपलब्ध होंगे, जिससे ट्रेनों की देरी की समस्या स्थायी रूप से समाप्त हो जाएगी। - झारखंड: गम्हरिया से चांडिल (तीसरी और चौथी लाइन)
झारखंड भारत का औद्योगिक हृदय है। गम्हरिया और चांडिल के बीच औद्योगिक माल की आवाजाही बहुत अधिक है। नई लाइनों के निर्माण से लौह अयस्क और कोयले की ढुलाई तेज होगी, जिससे उद्योगों की लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। - मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र: गोंदिया-जबलपुर (दोहरीकरण)
यह मार्ग मध्य भारत को दक्षिण और उत्तर से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस सिंगल लाइन सेक्शन का दोहरीकरण (Doubling) होने से ट्रेनों की क्रॉसिंग में लगने वाला समय बचेगा और मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों को मुख्यधारा के व्यापारिक केंद्रों से जोड़ा जा सकेगा।
PM गति शक्ति: रसद लागत में कमी और आर्थिक शक्ति
ये सभी परियोजनाएं PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अनुरूप हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ‘मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी’ प्रदान करना है।
- माल ढुलाई में उछाल: रेलवे की क्षमता बढ़ने से हर साल 52 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई संभव होगी। इसमें कोयला, सीमेंट, लोहा और अनाज जैसे आवश्यक सामान शामिल हैं।
- लॉजिस्टिक कॉस्ट: जब मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी, तो सामान की ढुलाई सस्ती होगी, जिसका सीधा फायदा आम जनता को कम कीमतों के रूप में मिलेगा।
पर्यावरण संरक्षण: 1 करोड़ पेड़ों के बराबर लाभ
यह परियोजना पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। रेलवे को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल माना जाता है। - तेल आयात में कटौती: सड़क से रेल की ओर ट्रैफिक शिफ्ट होने से सालाना करीब 6 करोड़ लीटर डीजल की बचत होगी, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।
- कार्बन फुटप्रिंट: इन योजनाओं से कार्बन उत्सर्जन में लगभग 30 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पर्यावरणीय लाभ 1 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
पर्यटन और धार्मिक केंद्रों का विकास
बेहतर रेल नेटवर्क से पर्यटन क्षेत्र को जबरदस्त बूस्ट मिलने वाला है। - मध्य प्रदेश: जबलपुर का प्रसिद्ध कचनार शिव मंदिर, भेड़ाघाट का धुआंधार जलप्रपात और कान्हा-पेंच नेशनल पार्क तक सैलानियों की पहुंच आसान होगी।
- झारखंड: वन्यजीव प्रेमियों के लिए दलमा अभयारण्य जाना अब और भी सुविधाजनक होगा। इससे स्थानीय होटलों, टैक्सी ऑपरेटरों और गाइडों के लिए आय के नए स्रोत खुलेंगे।
गुजरात को भी सौगात: GIFT सिटी मेट्रो का विस्तार
इसी बैठक में सरकार ने गुजरात मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (GMRC) के विस्तार को भी हरी झंडी दी। ₹1,067.35 करोड़ की लागत से 3.33 किलोमीटर लंबा नया मेट्रो कॉरिडोर बनाया जाएगा, जो आधुनिक भारत के वित्तीय केंद्र GIFT सिटी को शाहपुर से जोड़ेगा। - यह कॉरिडोर पूरी तरह से एलिवेटेड होगा और इसमें तीन स्टेशन होंगे।
- वर्ष 2041 तक इस लाइन पर प्रतिदिन 58,000 से अधिक यात्रियों के सफर करने का अनुमान है। यह अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच एक लाइफलाइन का काम करेगी।
निष्कर्ष: विकसित भारत की ओर एक कदम
9,072 करोड़ रुपये का यह निवेश भारतीय रेलवे को केवल आधुनिक ही नहीं बना रहा, बल्कि राज्यों के बीच की दूरियों को भी कम कर रहा है। 2030 तक इन परियोजनाओं के पूरा होने से भारत की परिवहन व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव आएगा, जो आर्थिक समृद्धि और पर्यावरणीय सुरक्षा का एक आदर्श उदाहरण होगा।









