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उत्तराखंड की सांस्कृतिक छटा में रंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, पहाड़ी परिधानों और आभूषणों से हुईं रूबरू

On: November 4, 2025 5:51 AM
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उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र में सोमवार को एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। सदन में जहां सियासी चर्चा की जगह संस्कृति का उल्लास छाया रहा, वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक पल को और भी गरिमामय बना दिया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति को उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों से परिचित कराया गया। उन्हें पहाड़ी टोपी, टिहरी की प्रसिद्ध नथ, कुमाऊं का पिछौड़ा, गुलोबंद, और जौनसार-बावर क्षेत्र की पारंपरिक पोशाक के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। राष्ट्रपति ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी परंपराएं हमारी असली पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित करना हम सभी का दायित्व है।
सत्र की शुरुआत में ही सदन का नजारा अत्यंत आकर्षक था। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एकजुट होकर पारंपरिक पहाड़ी वेशभूषा में नजर आए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धोती-कुर्ता और पहाड़ी टोपी धारण की थी, जबकि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने भी पारंपरिक टोपी और पिछौड़ा पहनकर परंपरा का सम्मान किया। लगभग सभी मंत्रियों और विधायकों ने अलग-अलग रंगों की टोपी पहन रखी थी, जिससे पूरा सदन उत्तराखंड की विविध सांस्कृतिक रंगत में डूबा नजर आया।
महिला विधायकों ने भी अपनी पारंपरिक साज-सज्जा से राष्ट्रपति का ध्यान अपनी ओर खींचा। विधायक आशा नौटियाल, सरिता आर्य और रेणु बिष्ट ने नथ, गुलोबंद और पिछौड़ा धारण कर अपनी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। उनकी इस पारंपरिक वेशभूषा ने सभा में विशेष आकर्षण उत्पन्न किया।
सत्र में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति के संबोधन को सुनने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत, हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल, डॉ. कल्पना सैनी सहित अनेक गणमान्य अतिथि विशेष दीर्घा में उपस्थित थे।
विधानसभा का यह विशेष सत्र राजनीति से अधिक संस्कृति और एकता का प्रतीक बन गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जहां राज्य की सांस्कृतिक विविधता की सराहना की, वहीं विधायकों और अतिथियों ने भी अपने परिधान और उत्साह से यह संदेश दिया कि उत्तराखंड अपनी परंपराओं और विरासत पर गर्व करता है।
यह विशेष सत्र न केवल राज्य की रजत जयंती का उत्सव बना, बल्कि यह भी प्रमाणित किया कि आधुनिकता की दौड़ में उत्तराखंड अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है।

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