देहरादून। उत्तराखंड में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली पीएम सूर्यघर योजना को राज्य सरकार के एक अहम निर्णय से झटका लग सकता है। 1 अप्रैल 2024 से राज्य सरकार ने इस योजना के अंतर्गत सोलर रूफटॉप प्लांट पर दी जाने वाली सब्सिडी को बंद कर दिया है, जिससे योजना की गति खासकर मैदानी जिलों में धीमी पड़ सकती है।
अब तक इस योजना के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों की ओर से सब्सिडी दी जा रही थी। तीन किलोवाट तक की क्षमता वाले सोलर संयंत्र पर केंद्र सरकार जहां 85,800 रुपये की सब्सिडी देती है, वहीं राज्य सरकार की ओर से 51,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की जा रही थी, यानी कुल मिलाकर एक लाभार्थी को 1.36 लाख रुपये तक की राहत मिल रही थी। राज्य सरकार की ओर से यह सहायता प्रति किलोवाट 17,000 रुपये के हिसाब से दी जाती थी।
लेकिन अब राज्य सरकार ने बढ़ते वित्तीय भार को देखते हुए अपनी ओर से मिलने वाली सब्सिडी को पूरी तरह बंद कर दिया है। इस फैसले का सबसे अधिक असर देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे जिलों पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि ये जिले अब तक योजना में सबसे ज्यादा भागीदारी निभाते आए हैं। दूसरी ओर, शेष नौ पर्वतीय जिलों में इस योजना को लेकर पहले ही उत्साह कम रहा है।
40 हजार सोलर रूफटॉप का लक्ष्य, अब चुनौती भरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत देशभर में एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तराखंड को अगले तीन वर्षों में 40 हजार रूफटॉप संयंत्र लगाने का लक्ष्य दिया गया है। योजना के प्रति लोगों का उत्साह इसी से समझा जा सकता है कि अब तक 55,236 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 23,251 सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से 16,543 लाभार्थियों को सब्सिडी भी वितरित की जा चुकी है।
केंद्र की सब्सिडी से ही अब आगे बढ़ेगी योजना
अब जबकि राज्य सरकार ने अपनी ओर से सब्सिडी बंद कर दी है, ऐसे में योजना का बोझ पूरी तरह केंद्र सरकार की सब्सिडी पर आ जाएगा। केंद्र सरकार अब तक 138 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी लाभार्थियों को दे चुकी है, जबकि राज्य सरकार को अभी 75 करोड़ रुपये की सब्सिडी और प्रदान करनी है।
ऊर्जा निगम और उरेडा की चिंता बढ़ी
इस अचानक हुए बदलाव से योजना को कार्यान्वित कर रही उत्तराखंड पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) और उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA) चिंतित हैं। दरअसल, देहरादून जिले के सबसे ज्यादा 5500 से अधिक लाभार्थी इस योजना से जुड़े हैं। इसके बाद नैनीताल के हल्द्वानी, फिर ऊधम सिंह नगर और हरिद्वार जिले आते हैं।
राज्य सरकार की सब्सिडी हटने से इन जिलों में लोगों की भागीदारी में गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है, जो कि अक्षय ऊर्जा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक बड़ी चुनौती बन सकती है। योजना के बेहतर प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को देशभर में प्रशंसा और पुरस्कार भी मिल चुके हैं, लेकिन अब आगे की राह थोड़ी कठिन हो सकती है।
यह भी पढें- पाहलगाम हमला: दून से पाक के गुरुद्वारों की यात्रा पर जत्था नहीं जाएगा, 15 साल में पहली बार यात्रा रद्द








