देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी आतंकी साजिश को विफल कर दिया है। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत प्रेमनगर क्षेत्र से एक संदिग्ध युवक को गिरफ्तार किया है, जो सीधे तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था। पकड़ा गया आरोपित भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण सरकारी भवनों की गोपनीय जानकारी सीमा पार भेज रहा था।
STF का ‘ऑपरेशन प्रहार’ और गिरफ्तारी
उत्तराखंड STF के एसएसपी अजय सिंह के नेतृत्व में चलाए गए ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत टीम ने झाझरा, प्रेमनगर निवासी 29 वर्षीय विक्रांत कश्यप को दबोचा है। आरोपित के पास से एक अवैध .32 बोर पिस्टल, सात जिंदा कारतूस, स्प्रे पेंट कैन और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य उसका मोबाइल फोन है, जिसमें पाकिस्तान भेजे गए वीडियो और लोकेशन के डिजिटल निशान मिले हैं।
पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था विक्रांत
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि विक्रांत कश्यप इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे आतंकी नेटवर्क के आकाओं के संपर्क में था। वह मुख्य रूप से शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी राणा से निर्देश ले रहा था। ये हैंडलर्स उसे भारत विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहे थे और उसे लालच दिया गया था कि काम पूरा होने के बाद उसे नेपाल के रास्ते दुबई सुरक्षित पहुंचा दिया जाएगा और मोटी रकम दी जाएगी।
सैन्य ठिकानों और सरकारी भवनों की रेकी
पकड़े गए आरोपित ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसने देहरादून के कई संवेदनशील स्थानों की रेकी की थी। उसने निम्नलिखित स्थानों के वीडियो और सटीक जीपीएस लोकेशन पाकिस्तान भेजी:
भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) और अन्य सैन्य क्षेत्र
अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT)
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय
महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान और भवन
सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये वीडियो और लोकेशन प्रधानमंत्री मोदी के 14 अप्रैल के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले साझा किए गए थे, जिससे किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
‘तहरीक-ए-तालिबान-हिन्दुस्तान’ के नाम पर दहशत फैलाने की कोशिश**
जांच में यह भी सामने आया है कि विक्रांत को केवल जासूसी ही नहीं, बल्कि शहर में मनोवैज्ञानिक डर फैलाने का काम भी सौंपा गया था। उसे “तहरीक-ए-तालिबान-हिन्दुस्तान के नाम से शहर की दीवारों पर स्प्रे पेंटिंग करने के निर्देश मिले थे। उसने राजधानी के कई सार्वजनिक स्थानों पर इस प्रतिबंधित संगठन का नाम लिखा और उसका वीडियो बनाकर अपने पाकिस्तानी आकाओं को भेजा, ताकि वह अपनी ‘वफादारी’ और ‘काम’ का सबूत दे सके।
सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप, बढ़ाई गई चौकसी
प्रधानमंत्री के दौरे से पहले इस तरह के इनपुट और गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। देहरादून में सुरक्षा घेरा अब पहले से कहीं अधिक कड़ा कर दिया गया है।
- बहुस्तरीय सुरक्षा: शहर के प्रवेश द्वारों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
- खुफिया निगरानी: एलआईयू (LIU) और केंद्रीय जांच एजेंसियां अब पुराने इनपुट खंगाल रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि विक्रांत के साथ शहर में और कौन-कौन से स्लीपर सेल सक्रिय हैं।
- डिजिटल जांच: एसटीएफ विक्रांत के मोबाइल से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास कर रही है ताकि उसके पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
एसएसपी एसटीएफ का बयान
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि आरोपित के खिलाफ प्रेमनगर थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा, *”यह गिरफ्तारी सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि राज्य में किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी गतिविधि पनपने न पाए। आरोपित से पूछताछ जारी है और कई अन्य कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है।”
निष्कर्ष
उत्तराखंड जैसे शांत प्रदेश में इस तरह की आतंकी घुसपैठ और जासूसी के मामले ने जनता और प्रशासन दोनों को सतर्क कर दिया है। ‘डून प्राइम न्यूज़’ अपने पाठकों से अपील करता है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।







