Pithoragarh News: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में शारदीय नवरात्र के दौरान आस्था और लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिली। बेरीनाग तहसील के उडियारी गांव में स्थित प्रसिद्ध नौलिंग बजैण मंदिर में 1008 दीप प्रज्ज्वलित कर भव्य दीपदान किया गया। इस दौरान गांव की महिलाएं पारंपरिक कुमाऊंनी वेशभूषा में नजर आईं। दीपों की रोशनी से मंदिर परिसर जगमगा उठा और धार्मिक आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने मां भगवती की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
नवरात्र के दौरान आयोजित पूजा-अर्चना, दीपदान, भंडारे और मेले ने इस मंदिर को क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र बना दिया। ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी ने आयोजन को और खास बनाया।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
1008 दीपों से जगमगाया नौलिंग बजैण मंदिर
शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर नौलिंग बजैण मंदिर में विशेष दीपदान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में पहुंचकर 1008 दीप जलाए। दीपों से सजे मंदिर परिसर का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
कुमाऊंनी वेशभूषा में महिलाओं की सहभागिता ने आयोजन में स्थानीय संस्कृति के रंग भी भर दिए। धार्मिक अनुष्ठान के साथ पारंपरिक पहनावे और सामूहिक पूजा ने पहाड़ की लोक परंपराओं को प्रदर्शित किया।
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बेरीनाग से 12 किलोमीटर दूर स्थित है मंदिर
नौलिंग बजैण मंदिर पिथौरागढ़ जिले की बेरीनाग तहसील से लगभग 12 किलोमीटर दूर उडियारी गांव में बांज के जंगल के बीच स्थित है। प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह मंदिर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है।
मंदिर में वर्षभर श्रद्धालु पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं, जिनमें आसपास के गांवों के लोग भी उत्साह से भाग लेते हैं।
Pithoragarh News नवरात्र के दस दिनों में विशेष पूजा और भंडारा
नवरात्र के दौरान मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवधि में ग्रामीण परिवार श्रद्धा के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। मंदिर परिसर में प्रतिदिन भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है, जहां पहुंचने वाले श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं।
ग्रामीणों के सहयोग से होने वाले इन आयोजनों में सामूहिक सहभागिता देखने को मिलती है। पूजा और भंडारे के माध्यम से लोगों को एक साथ आने और अपनी धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहने का अवसर मिलता है।
नवमी पर लगा भव्य मेला, आसपास के गांवों से पहुंचे श्रद्धालु
शारदीय नवरात्र की नवमी पर मंदिर परिसर में मेले का आयोजन किया गया। मेले को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह रहा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। धार्मिक आयोजन के साथ मेला ग्रामीणों के लिए आपसी मेल-मिलाप और लोक संस्कृति को करीब से अनुभव करने का अवसर भी बना।
भगवान मूल नारायण के पुत्रों से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, उडियारी गांव में भगवान मूल नारायण के दो पुत्रों नौलिंग और बजैण से संबंधित मंदिर स्थित है। श्रद्धालु यहां सालभर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में गोदान और सत्यनारायण कथा जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं।
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि सच्चे मन से यहां पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी विश्वास के चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
आस्था के साथ संस्कृति को भी मिल रहा बढ़ावा
नौलिंग बजैण मंदिर में नवरात्र के दौरान होने वाले आयोजन केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं। 1008 दीपों का दीपदान, कुमाऊंनी वेशभूषा में महिलाओं की भागीदारी, सामूहिक भंडारा और नवमी का मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने लाते हैं।
ग्रामीणों के सहयोग से आयोजित ये कार्यक्रम स्थानीय परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित नौलिंग बजैण मंदिर नवरात्र के अवसर पर आस्था, सामाजिक एकजुटता और कुमाऊंनी संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरता है।





