अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

नहीं रहे पद्मश्री ह्यूग गैंट्जर, मसूरी ने खो दिया अपना ग्लोबल ब्रांड एंबेसडर

On: February 3, 2026 12:19 PM
Follow Us:

मसूरी: विश्वप्रसिद्ध अंग्रेज़ी ट्रैवल राइटर और पद्मश्री सम्मानित ह्यूग गैंट्जर का निधन हो गया है। 94 वर्ष की आयु में उन्होंने किंक्रेग लाइब्रेरी रोड स्थित अपने आवास ‘ओक ब्रुक’ में अंतिम सांस ली। उनके निधन से मसूरी ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के साहित्य और ट्रैवल जर्नलिज्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। ह्यूग गैंट्जर उन विरले व्यक्तित्वों में शामिल थे, जिन्होंने भारत की संस्कृति, विरासत और पर्यटन को वैश्विक मंच पर विशेष पहचान दिलाई।
नेवी कमांडर से ट्रैवल जर्नलिज्म तक का सफरभारतीय नौसेना में कमांडर के रूप में सेवाएं देने वाले ह्यूग गैंट्जर सेवानिवृत्ति के बाद मसूरी आकर बस गए थे। यहीं से उन्होंने अपनी पत्नी कोलीन गैंट्जर के साथ मिलकर ट्रैवल राइटिंग को एक नई दिशा दी। बीते करीब पांच दशकों तक यह जोड़ी भारत के अनछुए पर्यटन स्थलों, सांस्कृतिक विरासत और लोक जीवन को दुनिया के सामने लाने में जुटी रही।
30 से अधिक किताबें, 52 डॉक्यूमेंट्री और हजारों लेखों की अमूल्य धरोहरह्यूग और कोलीन गैंट्जर का योगदान उनके साहित्यिक कार्यों से साफ झलकता है। 30 से ज्यादा पुस्तकें, हजारों लेख और दूरदर्शन पर प्रसारित 52 चर्चित डॉक्यूमेंट्री उनकी रचनात्मक विरासत का हिस्सा हैं। उनकी लेखनी ने भारत को सिर्फ एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया। इसी अतुलनीय योगदान के लिए गणतंत्र दिवस 2025 पर इस जोड़ी को ट्रैवल जर्नलिज्म के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था।
मसूरी को ‘घर’ मानने वाला लेखकप्रसिद्ध लेखक, साहित्यकार और इतिहासकार गणेश शैली ने ह्यूग गैंट्जर को याद करते हुए कहा कि वे मसूरी को अपना सच्चा ‘घर’ मानते थे। शहर की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर उनकी पैनी नजर रहती थी। गैंट्जर परिवार सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों का एक सक्रिय केंद्र रहा। उनके निधन से मसूरी सचमुच गरीब हो गई है।
पर्यावरण संरक्षण में निभाई अहम भूमिकाह्यूग गैंट्जर को केवल एक लेखक के रूप में ही नहीं, बल्कि मसूरी के संरक्षक के रूप में भी याद किया जाएगा। जब मसूरी में चूना खनन और अनियंत्रित निर्माण से पहाड़ों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था, तब उन्होंने खुलकर आवाज उठाई। उनके प्रयासों के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मसूरी में खनन पर रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य के रूप में भी उन्होंने मसूरी को पर्यावरणीय विनाश से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रिश्तों में बसने वाला सादगीपूर्ण व्यक्तित्वस्थानीय लोगों के अनुसार, ह्यूग गैंट्जर सिर्फ एक लेखक नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसे थे। दिवाली और क्रिसमस पर उपहार भेजना उनकी परंपरा थी। मिठाइयों के प्रति उनका खास लगाव और लोगों के सुख-दुख में दिलचस्पी उन्हें बेहद खास बनाती थी।
पत्नी कोलीन का 2024 में हुआ था निधनह्यूग गैंट्जर की धर्मपत्नी और लेखन सहयोगी कोलीन गैंट्जर का निधन 6 नवंबर 2024 को हुआ था। अब यह ऐतिहासिक जोड़ी हमेशा के लिए स्मृतियों में सिमट गई है। ह्यूग गैंट्जर का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह कैमल्स बैक कब्रिस्तान स्थित पारिवारिक प्लॉट में किया जाएगा।
जन्म, शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमिह्यूग गैंट्जर का जन्म 9 जनवरी 1931 को पटना में हुआ था। उन्होंने मसूरी के हैम्पटन कोर्ट स्कूल और सेंट जॉर्ज कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद सेंट जोसेफ स्कूल नैनीताल, सेंट जेवियर्स कॉलेज कलकत्ता और मुंबई के केसी लॉ कॉलेज से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। उनके पिता जे.एफ. गैंट्जर ब्रिटिश काल में वर्ष 1941-43 तक मसूरी नगर पालिका के प्रशासक और चेयरमैन रहे थे।
लेखक बनने की दिलचस्प कहानीएक इंटरव्यू में ह्यूग गैंट्जर ने बताया था कि वे यात्रा करना और लिखना चाहते थे, जबकि कोलीन को लिखना पसंद नहीं था, लेकिन उन्हें यात्रा करना अच्छा लगता था। दोनों के बीच एक समझौता हुआ—ह्यूग ने फिर से यात्रा शुरू की और कोलीन लिखने के लिए तैयार हो गईं। इसी साझेदारी से वे दुनिया के जाने-माने ट्रैवल राइटर बने।
ह्यूग गैंट्जर के निधन पर सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, साहित्यकारों और आम नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी का मानना है कि मसूरी ने आज केवल एक लेखक नहीं, बल्कि अपनी आत्मा का एक अहम हिस्सा खो दिया है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment