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डॉग शो के पहले दिन जर्मन शेफर्ड बना आकर्षण का मुख्य केंद्र, माली और डाक्सी ने जीता खिताब

On: December 14, 2025 5:41 AM
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देहरादून में आयोजित दो दिवसीय डॉग शो के पहले दिन जर्मन शेफर्ड नस्ल के कुत्ते आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। अपनी दमदार कद-काठी, शानदार चाल और अनुशासित प्रदर्शन के चलते जर्मन शेफर्ड ने दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं माली और डाक्सी नस्ल के कुत्तों ने अपने-अपने वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन कर विजेता का खिताब अपने नाम किया।
दून वैली कैनल क्लब की ओर से पुलिस लाइन मैदान में आयोजित इस डॉग शो में पहले दिन कुल 125 कुत्तों ने विभिन्न श्रेणियों में हिस्सा लिया। नौ महीने की श्रेणी में माली और छह महीने की श्रेणी में डाक्सी ने प्रथम स्थान हासिल किया। दोनों विजेता कुत्ते पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। आयोजकों के अनुसार, शो के दूसरे दिन विभिन्न प्रजातियों के करीब 400 कुत्ते प्रतियोगिता में शामिल होंगे।
सुबह से ही देहरादून के साथ-साथ दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश से प्रतिभागी अपने जर्मन शेफर्ड कुत्तों के साथ मैदान में पहुंचे। कुल प्रतिभागी कुत्तों में आठ विदेशी नस्ल के कुत्ते भी शामिल रहे। प्रतियोगिता का मूल्यांकन ऑस्ट्रेलिया से आए अंतरराष्ट्रीय निर्णायक विनसैनजो टेनटैरा द्वारा किया गया। उन्होंने जर्मन शेफर्ड कुत्तों की शारीरिक बनावट, ऊंचाई, चाल और संतुलन के आधार पर अंक प्रदान किए।
डॉग शो में छह महीने से लेकर चार वर्ष तक की आयु के कुत्तों ने हिस्सा लिया। देवभूमि पेट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रतीक गर्ग ने बताया कि मुख्य आयोजन दूसरे दिन होगा, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 400 भिन्न-भिन्न नस्लों के कुत्ते भाग लेंगे। इनमें लेब्राडोर, ग्रेट डेन, गोल्डन रिट्रीवर, बीगल सहित कई अन्य लोकप्रिय नस्लें शामिल होंगी। पहले दिन की कुछ श्रेणियों के परिणाम देर शाम तक घोषित किए गए, जबकि सभी श्रेणियों के अंतिम परिणाम दूसरे दिन जारी किए जाएंगे।
एसी और पंखे में रखे गए जर्मनी से आए विदेशी कुत्ते
डॉग शो में सर्बिया मूल के आठ विदेशी कुत्ते भी आकर्षण का विषय बने रहे। इन कुत्तों को हाल ही में जर्मनी से भारत आयात किया गया है, जिन्हें पंजाब और अन्य राज्यों के शौकीनों ने खरीदा है। ठंडे वातावरण के आदी इन कुत्तों को देहरादून की जलवायु में गर्मी महसूस हो रही है, जिसके चलते उनके लिए विशेष रूप से पंखे और एसी की व्यवस्था की गई है।
हरियाणा से आए कुत्ता मालिक कपिल कुमार ने बताया कि इन विदेशी नस्लों को कम तापमान में रखना बेहद जरूरी होता है। वहीं, हरियाणा के ही राजीव सिंह ने बताया कि जर्मनी में लगातार ठंडे मौसम के कारण इन कुत्तों को वही आदत हो जाती है। भारत में अधिक तापमान होने से उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए उन्हें एसी और पंखे की सुविधा में रखा जाता है।

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