Nanda Devi Badi Jat Controversy Deepens Over Wan Entry Row
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Nanda Devi Badi Jat Controversy: नंदा देवी बड़ी जात को लेकर फिर बढ़ी तकरार, वांण गांव में श्रद्धालुओं की एंट्री पर क्यों उठे सवाल?

On: September 10, 2026 3:45 AM
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Nanda Devi Badi Jat Controversy over pilgrim entry and arrangements in Wan village

Nanda Devi Badi Jat Controversy: उत्तराखंड की ऐतिहासिक और धार्मिक यात्रा नंदा देवी बड़ी जात को लेकर विवाद एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा देवी की तीन डोलियां कैलाश यात्रा के लिए रवाना होने के बाद भी यात्रा को लेकर मतभेद खत्म नहीं हुए हैं। अब मामला यात्रा मार्ग के अंतिम गांव वांण से जुड़ गया है, जहां श्रद्धालुओं के पहुंचने और संभावित अव्यवस्था को लेकर ग्राम प्रधान की ओर से जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया। इसके बाद चमोली प्रशासन ने बड़ी जात आयोजन समिति को चेतावनी पत्र जारी किया है।

वहीं, प्रशासन की चिट्ठी के जवाब में बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने भी तीन पन्नों का जवाब भेजा है। समिति ने यात्रा में कथित रूप से अवरोध पैदा करने के आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की जांच की मांग की है। ऐसे में Nanda Devi Badi Jat Controversy अब धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर प्रशासनिक और सामाजिक समन्वय का भी विषय बन गई है।

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वांण गांव में क्या है पूरा विवाद?

चार सितंबर को चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार की ओर से नायब तहसीलदार नंदानगर (घाट) के माध्यम से बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजा गया। इसमें वांण गांव की ग्राम प्रधान नंदुली देवी की ओर से भेजी गई शिकायत का हवाला दिया गया।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

ग्राम प्रधान ने आशंका जताई थी कि बड़ी जात के दौरान मां राजराजेश्वरी की डोली के साथ अन्य डोलियां और बड़ी संख्या में श्रद्धालु वांण गांव पहुंचेंगे। इससे गांव में अव्यवस्था और कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होने की संभावना है। प्रशासन ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आयोजन समिति से गांव के लोगों के साथ बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने को कहा है।

डीएम ने समिति को दी क्या चेतावनी?

जिलाधिकारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि यात्रा के दौरान यदि शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है तो जिम्मेदारी तय की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने आयोजन समिति से ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के साथ विचार-विमर्श कर आपसी सहमति बनाने की अपेक्षा की है।

इस पूरे घटनाक्रम ने Nanda Devi Badi Jat Controversy को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। एक तरफ प्रशासन संभावित भीड़ और व्यवस्था को लेकर सतर्क है, वहीं आयोजन समिति का कहना है कि यात्रा पहले से तय धार्मिक परंपरा और सहमति के अनुसार आयोजित की जा रही है।

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आयोजन समिति ने प्रशासन को क्या जवाब दिया?

डीएम के पत्र के जवाब में सोमवार को आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने तीन पेज का पत्र प्रशासन को भेजा। समिति का कहना है कि बड़ी जात यात्रा का कार्यक्रम अचानक तैयार नहीं किया गया है। इसे कई महीने पहले सिद्धपीठ कुरूड़ के पुजारियों, डोली समितियों और मंदिर समिति की सहमति से विधिवत तय किया गया था।

समिति ने आरोप लगाया कि गौड़ पुजारियों का एक गुट, जिसका संबंध राजजात समिति नौटी से भी बताया गया है, यात्रा में अवरोध उत्पन्न करने का प्रयास कर रहा है। कर्नल रावत ने इसे कथित तौर पर एक सोची-समझी योजना बताते हुए प्रशासन से मामले की जांच कराने की मांग की है।

हालांकि ये आरोप आयोजन समिति की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित पक्ष का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में विवाद के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

लाटू देवता मंदिर को लेकर क्या कहा गया?

समिति अध्यक्ष ने अपने जवाब में वांण गांव के धार्मिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गांव में नंदा देवी के धर्मभाई लाटू देवता का पौराणिक मंदिर स्थित है। यह मंदिर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है।

समिति का तर्क है कि ऐसे धार्मिक स्थल की यात्रा के दौरान वांण में श्रद्धालुओं के प्रवेश को लेकर रोक या आपत्ति का मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ जाता है। इसी आधार पर समिति ने प्रशासन से पूरे मामले को संवेदनशीलता के साथ देखने की अपील की है।

यात्रा की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी किसकी?

बड़ी जात समिति ने अपने पत्र में कहा है कि यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और श्रद्धालुओं को जरूरी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की है। समिति ने यह भी कहा कि वह प्रशासन के साथ समन्वय और बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है।

यात्रा मार्ग पहाड़ी, दुर्गम और कई जगह निर्जन होने के कारण प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं की चुनौती भी बड़ी है। समिति ने मांग की है कि यात्रा शुरू होने से पहले ही ऐसे स्थानों पर पानी, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को रास्ते में किसी तरह की परेशानी न हो।

होमकुंड तक यात्रा में क्या होगी चुनौती?

अब नंदा देवी की डोलियां कैलाश गमन के तहत आगे बढ़ चुकी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना के बीच प्रशासन को यात्रा मार्ग पर विशेष निगरानी रखनी होगी। खासकर वांण से आगे के दुर्गम हिस्सों और अंतिम पड़ावों पर सुरक्षा तथा बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

Nanda Devi Badi Jat Controversy के बीच प्रशासन के लिए सबसे अहम मुद्दा यही रहेगा कि धार्मिक परंपरा भी कायम रहे और यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था भी पूरी तरह नियंत्रित रहे।

धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी

नंदा देवी बड़ी जात केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा आयोजन है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी विवाद का असर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे में सभी पक्षों के बीच बातचीत और समन्वय से समाधान निकालना जरूरी माना जा रहा है।

ग्राम प्रधान की शिकायत और आयोजन समिति के जवाब के बाद अब प्रशासन के सामने दोनों पक्षों के दावों को समझकर व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करने की चुनौती है। यदि समय रहते सहमति बनती है तो यात्रा सुचारू रूप से आगे बढ़ सकती है और विवाद को भी शांत किया जा सकता है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि वांण गांव को लेकर प्रशासन और बड़ी जात समिति के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। क्या श्रद्धालुओं के प्रवेश और यात्रा व्यवस्था को लेकर कोई स्पष्ट सहमति बनती है, क्या प्रशासन दुर्गम यात्रा मार्ग पर अतिरिक्त इंतजाम करता है और क्या आरोपों की जांच आगे बढ़ती है—इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे।

Nanda Devi Badi Jat Controversy के बीच नंदा देवी की डोलियां कैलाश की ओर बढ़ रही हैं। ऐसे में यात्रा की आस्था, परंपरा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा—तीनों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन और आयोजन समिति के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता रहने वाली है।

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