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एम्स ऋषिकेश में 2.73 करोड़ का घोटाला, पूर्व निदेशक समेत अधिकारी सीबीआई के शिकंजे में

On: September 29, 2025 4:38 AM
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देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर एम्स ऋषिकेश घोटाले की गूंज सुनाई दी है। इस बार मामला 2.73 करोड़ रुपये के गबन का है, जिसमें एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रविकांत समेत तत्कालीन एडिशनल प्रोफेसर और स्टोर कीपर पर गंभीर आरोप लगे हैं। सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि कोरोनरी केयर यूनिट (सीसीयू) की स्थापना के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।

ऐसे हुआ खुलासा

सीबीआई को शिकायत मिली थी कि एम्स में स्थापित किए जा रहे 16 बेड के कोरोनरी केयर यूनिट में धांधली हुई है। इस पर कार्रवाई करते हुए 26 मार्च 2025 को सीबीआई ने कार्डियोलॉजी विभाग में छापेमारी की। जांच के दौरान सीसीयू से जुड़ी निविदा की पूरी फाइल मांगी गई, लेकिन सीनियर स्टोर अधिकारी दीपक जायसवाल ने बताया कि वह लंबे समय से गायब है। इसके बाद रिकॉर्ड रूम खंगाला गया, लेकिन फाइल नहीं मिली।

अधूरा व घटिया काम

सीबीआई और एसीबी की संयुक्त टीम ने निरीक्षण में पाया कि सीसीयू अधूरा और गैर-कार्यात्मक है। ठेकेदार की ओर से सप्लाई की गई कई वस्तुएं या तो बेहद घटिया थीं या फिर पूरी तरह गायब।

स्टॉक रजिस्टर में दर्ज था कि अस्पताल को

200 वर्ग मीटर आयातित दीवार पैनल,

91 वर्ग मीटर आयातित छत सामग्री,

10 मल्टी पैरा मॉनिटर,

और एयर प्यूरीफायर सप्लाई किए गए हैं।

लेकिन मौके पर इनमें से कुछ भी मौजूद नहीं मिला और न ही स्टॉक रजिस्टर में उनकी प्रविष्टि दर्ज थी।

ठेकेदार को अनुचित लाभ

जांच में सामने आया कि दिल्ली की कंपनी मेसर्स प्रो मेडिक डिवाइसेस को ठेका देकर यह सारा खेल रचा गया। ठेकेदार को भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन सामान कभी पहुंचा ही नहीं। इस तरह एम्स को 2.73 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया, जबकि अधिकारियों और ठेकेदार ने अनुचित लाभ उठाया।

गबन में शामिल अधिकारी

सीबीआई ने जिन पर मुकदमा दर्ज किया है, उनमें शामिल हैं—

डॉ. रविकांत, तत्कालीन निदेशक एम्स ऋषिकेश

डॉ. राजेश पसरीचा, एडिशनल प्रोफेसर रेडिएशन ऑन्कोलॉजी

रूप सिंह, तत्कालीन स्टोर कीपर (आउटसोर्स कर्मचारी)

इसके अलावा ठेकेदार पुनीत शर्मा (मेसर्स प्रो मेडिक डिवाइसेस, दिल्ली के मालिक) पर भी धोखाधड़ी का आरोप है। हालांकि पुनीत शर्मा का निधन हो चुका है।

सीबीआई की कार्रवाई

एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और सीबीआई ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह षड्यंत्रपूर्वक किया गया घोटाला है, जिसमें फाइलों तक को गायब कर दिया गया ताकि भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला जा सके।

इस तरह एम्स ऋषिकेश में एक और बड़ा घोटाला उजागर हुआ है, जिसने संस्थान की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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