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100% मूंग एमएसपी खरीद की मांग को लेकर भोपाल में किसानों का बड़ा आंदोलन: 7 दिन का राशन लेकर पहुंचे हजारों अन्नदाता, सुरक्षा सख्त

On: July 29, 2026 4:58 AM
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Thousands of farmers protesting on Bhopal highway with ration and tents demanding 100% MSP on moong crops.

​भोपाल:

मध्य प्रदेश में मूंग की पूरी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदे जाने की मांग को लेकर किसानों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार को प्रदेशभर से आए हजारों किसान अनाज की बोरियाँ, बिस्तर, खाना पकाने के बर्तन और करीब एक हफ्ते का राशन-पानी साथ लेकर राजधानी भोपाल के बाहरी इलाकों में दाखिल हो गए। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले 19 किसान संगठनों के आह्वान पर यह मार्च निकाला जा रहा है।

किसान फिलहाल सावरकर सेतु के आसपास डेरा डाले हुए हैं और मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच करने की तैयारी में हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।

​सावरकर सेतु पर डाला डेरा, सुरक्षा बल मुस्तैद

​मंगलवार रात रायसेन और ओबैदुल्लागंज के रास्ते भोपाल सीमा में प्रवेश करने वाले किसान काफिले को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। शहर के प्रवेश द्वारों, मंडीदीप बॉर्डर और टोल प्लाजा पर कई परतों (मल्टी-लेयर) की मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

​प्रशासनिक अधिकारी लगातार किसान नेताओं से वार्ता कर ज्ञापन सौंपने और आंदोलन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन आंदोलनकारी किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। किसानों का साफ कहना है कि जब तक सरकार मूंग की 100 प्रतिशत खरीद और खाद वितरण जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान का लिखित आश्वासन नहीं देती, वे भोपाल से वापस नहीं लौटेंगे।

​नर्मदापुरम के सेठानी घाट से शुरू हुआ था ‘भोपाल मार्च’

​इस बड़े जनआंदोलन की शुरुआत नर्मदापुरम जिले से हुई। सबसे पहले किसान सेठानी घाट पर एकत्रित हुए और वहां से भोपाल की ओर पदयात्रा व वाहनों के जरिए मार्च शुरू किया। शुरुआत में स्थानीय प्रशासन ने किसानों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, जिससे किसान वहीं धरने पर बैठ गए।

​जैसे-जैसे समय बीता, तनाव बढ़ता देख प्रशासन ने शाम को बैरिकेड्स हटा दिए। इसके बाद किसानों का विशाल जत्था ओबैदुल्लागंज और रायसेन जिलों से गुजरते हुए मंगलवार रात राजधानी की सीमाओं तक पहुँच गया।

​100% एमएसपी खरीद की मांग क्यों कर रहे हैं किसान?

​किसान नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार ने अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों की 100% फसल एमएसपी पर खरीदने का फैसला किया है, लेकिन मूंग को अभी भी ‘प्राइस सपोर्ट स्कीम’ (PSS) के तहत ही खरीदा जा रहा है।

​इस योजना के नियमों के अनुसार, सरकार किसी राज्य के कुल अनुमानित उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत हिस्सा ही एमएसपी पर खरीदती है। इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है, क्योंकि 75 प्रतिशत उपज उन्हें खुले बाजार में औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है।

​वर्तमान सीजन के लिए मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹8,768 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि खुले बाजार में व्यापारियों द्वारा किसानों को इससे काफी कम दाम दिए जा रहे हैं। किसान नेता संतोष पटवारी ने बताया कि वे बीते 20 दिनों से लगातार जिला स्तर पर ज्ञापन दे रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई न होने के कारण उन्हें भोपाल कूच करने का यह कदम उठाना पड़ा।

​राज्य सरकार ने केंद्र को लिखी चिट्ठी

​भोपाल में किसानों के जमावड़े और बढ़ते दबाव के बीच मोहन यादव सरकार ने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को औपचारिक पत्र भेजा है।

​पत्र में उल्लेख किया गया है कि राज्य में मई से जुलाई के बीच लगभग 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का बंपर उत्पादन हुआ है। हालांकि, मौजूदा नीति के तहत केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का ही लक्ष्य तय किया गया है। राज्य सरकार ने आशंका जताई है कि यदि खरीद की सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो प्रदेश के अधिकांश किसान एमएसपी के लाभ से वंचित रह जाएंगे।

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​ग्रामीण इलाकों में गहराता कृषि असंतोष

​भोपाल में जारी यह प्रदर्शन केवल मूंग खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में व्याप्त गहरे असंतोष को भी रेखांकित करता है। किसान संगठनों का आरोप है कि पिछले कई सीजनों से फसलों की सरकारी खरीद में अनावश्यक देरी, कड़े नियम, पोर्टल पर पंजीकरण की तकनीकी समस्याएं और बुवाई के समय रासायनिक खादों (डीएपी और यूरिया) की भारी किल्लत आम बात हो गई है।

​लागत बढ़ने और बाजार में अनिश्चितता के कारण बंपर पैदावार होने के बावजूद अन्नदाता आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर है। फिलहाल राजधानी भोपाल में गतिरोध जारी है और पुलिस-प्रशासन पूरी स्थिति पर बारीक नजर बनाए हुए है।

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