मसूरी के कैंपटी क्षेत्र में रविवार दोपहर बाद अचानक मौसम ने रौद्र रूप धारण कर लिया। करीब तीन बजे तेज़ बारिश के चलते कैंपटी फॉल का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और झरना उफान पर आ गया। झरने के साथ भारी मात्रा में पहाड़ी मलबा और बड़े-बड़े पत्थर बहकर नीचे आने लगे। यह नजारा देखकर पर्यटकों और आसपास के दुकानदारों में हड़कंप मच गया।
प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पर्यटकों को कैंपटी फॉल के पास जाने से रोक दिया और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। वहीं झील के आसपास मलबा और पत्थरों का जमाव होने से पानी का बहाव बाधित हुआ और उसका असर निचले इलाकों तक देखने को मिला। हाईवे से होकर बहता पानी तीन से चार दुकानों के भीतर तक जा घुसा, जिससे दुकानदारों को नुकसान का सामना करना पड़ा।

त्यूणी-मलेथा हाईवे पर कैंपटी क्षेत्र में मलबा आने के कारण यातायात करीब आधे घंटे तक प्रभावित रहा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा जेसीबी मशीन की मदद से सड़क से मलबा हटाया गया और यातायात को दोबारा सुचारु किया गया।
कैंपटी थानाध्यक्ष संजय मिश्रा ने बताया कि झरने के जलस्तर में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन समय रहते सुरक्षा उपाय अपनाए जाने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई। पर्यटकों को पहले ही झरने में प्रवेश से रोक दिया गया था।
मूसलाधार बारिश का असर सिर्फ कैंपटी तक ही सीमित नहीं रहा। मसूरी-दून मार्ग, कैंपटी रोड और किमाड़ी मार्ग पर भी जगह-जगह मलबा आने से आवागमन प्रभावित हुआ। मसूरी-किमाड़ी मार्ग तो एक घंटे से अधिक समय तक पूरी तरह से बंद रहा। साथ ही बारिश के कारण तापमान गिरकर 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे क्षेत्र में फिर से ठंड लौट आई।
पर्यटन पर भी इस बारिश का असर साफ दिखा। कई पर्यटक होटल से बाहर नहीं निकल सके और स्थानीय व्यवसाय प्रभावित हुआ। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जितेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि किलोमीटर 14 पर मलबा हटाकर यातायात को बहाल कर दिया गया है।








