जोशीमठ (चमोली): देवभूमि उत्तराखंड के मुख्य द्वार और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जोशीमठ में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार शाम को नगर पालिका परिसर के भीतर निर्माणाधीन एक भवन (मीट बाजार स्थित निर्माणाधीन टीटी हॉल) में सामूहिक नमाज अदा करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और व्यापारिक संगठनों में गहरा रोष व्याप्त है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, बुधवार देर शाम नगर पालिका के पुराने मीट बाजार क्षेत्र में स्थित उस हॉल में नमाज पढ़ी गई, जहां वर्तमान में खिलाड़ियों के लिए टेबल टेनिस (TT) हॉल का निर्माण कार्य चल रहा है। स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि निर्माणाधीन ढांचे के भीतर बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा कर रहे हैं।
जैसे ही यह वीडियो स्थानीय ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर फैला, लोग सड़कों पर उतर आए और इसे सार्वजनिक स्थल के दुरुपयोग और देवभूमि की मर्यादा के खिलाफ बताया।
स्थानीय लोगों की चिंता: बढ़ती संख्या और सत्यापन का मुद्दा
जोशीमठ के स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से शहर में बाहरी और गैर-हिंदू व्यक्तियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
- सुरक्षा और जनसांख्यिकी: स्थानीय लोगों का मानना है कि नमाज पढ़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान पर संकट मंडरा रहा है।
- सत्यापन का अभाव: निवासियों का सवाल है कि क्या प्रशासन और पुलिस ने इन सभी व्यक्तियों का उचित सत्यापन (Verification) किया है? लोगों का आरोप है कि काम के बहाने बाहर से आने वाले लोग यहाँ बस रहे हैं और बिना किसी अनुमति के धार्मिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
- निर्माण स्थल का दुरुपयोग: जिस स्थान पर नमाज पढ़ी गई, वह खिलाड़ियों के लिए प्रस्तावित हॉल है। खेल के मैदान या सार्वजनिक हॉल को इस तरह धार्मिक स्थल में बदलना नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल
मामला गरमाने के बाद स्थानीय संगठनों ने पुलिस प्रशासन से सभी बाहरी व्यक्तियों के तत्काल सत्यापन की मांग की है। लोगों का कहना है कि जोशीमठ एक संवेदनशील क्षेत्र है, जो चीन सीमा के करीब होने के साथ-साथ धार्मिक रूप से बद्रीनाथ धाम का प्रवेश द्वार भी है। ऐसे में बिना किसी रिकॉर्ड के रह रहे बाहरी लोगों की बढ़ती संख्या सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकती है।
स्थानीय संगठनों की चेतावनी
व्यापार सभा और अन्य स्थानीय संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही बाहरी व्यक्तियों का सत्यापन नहीं किया और इस तरह की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई, तो वे बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने मांग की है कि निर्माण कार्य में लगे ठेकेदारों को भी कड़े निर्देश दिए जाएं कि वे अपने मजदूरों का पूरा ब्योरा पुलिस को दें।
“देवभूमि की मर्यादा और जोशीमठ की संवेदनशीलता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि नगर पालिका हॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों का धार्मिक उपयोग तुरंत बंद हो और हर बाहरी व्यक्ति की जांच की जाए।” — एक स्थानीय निवासी।
निष्कर्ष
फिलहाल, इस वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। देखना होगा कि प्रशासन स्थानीय लोगों की ‘सत्यापन’ की मांग पर कितनी जल्दी ठोस कार्रवाई करता है। यह घटना एक बार फिर उत्तराखंड में बाहरी व्यक्तियों के बढ़ते प्रभाव और स्थानीय जनसांख्यिकीय बदलाव की बहस को हवा दे गई है।




