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​Major Tragedy in Jaipur: आमेर में निर्माणाधीन इमारत की दीवार ढहने से 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई मलबे में दबे; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

On: June 29, 2026 9:25 AM
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Rescue operation at a massive construction site collapse in Jaipur. Workers in hard hats and vests clear a pile of rubble mixed with rebar and bricks. A large yellow JCB excavator is in the center-left, actively removing heavy concrete slabs. Multiple police officers and emergency vehicles, including an ambulance, form a cordon in the background under floodlights.

Major Tragedy in Jaipur

राजस्थान की राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक पर्यटन क्षेत्र आमेर से एक बेहद दुखद और बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत की भारी-भरकम दीवार अचानक भरभराकर ढह गई। इस हृदयविदारक दुर्घटना में कार्यस्थल पर मौजूद तीन स्थानीय मजदूरों की मौके पर ही मलबे में दबने से दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, मलबे के नीचे अभी भी कई अन्य मजदूरों के फंसे होने की गंभीर आशंका बनी हुई है। घटना के बाद से पूरे इलाके में चीख-पुकार और हड़कंप मच गया है।


​घटना की भयावहता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमों के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के विशेष दस्तों को तुरंत मौके पर भेजा गया है। युद्ध स्तर पर बचाव कार्य (Rescue Operation) शुरू कर दिया गया है।


​कैसे और कब हुआ यह दर्दनाक हादसा?


​प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार, आमेर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक रिहायशी/व्यावसायिक इलाके में पिछले कुछ समय से एक निजी इमारत का निर्माण कार्य चल रहा था। रोजाना की तरह सोमवार को भी बड़ी संख्या में निर्माण श्रमिक वहां काम कर रहे थे। चश्मदीदों के मुताबिक, दोपहर के समय अचानक एक तरफ की विशालकाय दीवार तेज धमाके के साथ ढह गई।


​दीवार के ठीक नीचे काम कर रहे मजदूरों को संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिला और वे टन वजनी मलबे के नीचे दब गए। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर दौड़े और धूल का गुबार छंटने के बाद तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को सूचित किया गया।
​कलेक्टर संदेश नायक ने की 3 मौतों की पुष्टि

​हादसे की सूचना मिलते ही जयपुर के जिला कलेक्टर संदेश नायक, पुलिस कमिश्नरेट के आला अधिकारी और स्थानीय विधायक व प्रशासनिक अमला तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। कलेक्टर संदेश नायक ने मीडिया से बात करते हुए आधिकारिक तौर पर तीन श्रमिकों की मृत्यु की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मलबे से अब तक तीन शवों को बाहर निकाला जा चुका है, जिन्हें पोस्टमार्टम और शिनाख्त के लिए नजदीकी राजकीय अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया गया है।


​कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे के नीचे दबे हर एक जीवन को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए मौके पर भारी मशीनरी, हाइड्रोलिक क्रेन और अर्थमूवर्स (JCB) को तैनात किया गया है ताकि मलबे को सावधानीपूर्वक हटाकर फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द लाइफ सपोर्ट दिया जा सके।


​NDRF और SDRF ने संभाला मोर्चा, घायलों की स्थिति गंभीर

हादसे की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार के निर्देश पर NDRF और SDRF की प्रशिक्षित आपदा प्रबंधन टीमों ने कमान संभाल ली है। कंक्रीट और सरियों के भारी मलबे को काटने के लिए कटर और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका वाले मजदूरों की संख्या को देखते हुए एंबुलेंस और डॉक्टरों की एक विशेष टीम को मौके पर ही ‘स्टैंडबाय’ पर रखा गया है।


​अब तक मलबे से निकाले गए कुछ गंभीर रूप से घायल मजदूरों को तुरंत ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल और नजदीकी ट्रॉमा सेंटर भेजा गया है। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसके कारण हताहतों की संख्या बढ़ने का अंदेशा जताया जा रहा है।

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​निर्माण मानकों की अनदेखी और सुरक्षा पर खड़े हुए बड़े सवाल

​इस भीषण हादसे ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली लापरवाही और मजदूरों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस इमारत के निर्माण में सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। दीवार की मजबूती और नींव को लेकर पहले भी लापरवाही की बातें सामने आ रही थीं, लेकिन संबंधित ठेकेदार या बिल्डर ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।


​विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण के दौरान यदि उचित सपोर्ट (Scaffolding) या शटरिंग का इस्तेमाल किया गया होता, तो शायद इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था। बिना किसी सुरक्षा उपकरण (जैसे हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या बूट्स) के मजदूरों से इतनी ऊंचाई और जोखिम भरे माहौल में काम कराया जा रहा था।


​प्रशासन सख्त: जांच कमेटी गठित, दोषियों पर होगी कार्रवाई

​हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जयपुर जिला प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच के आदेश दे दिए हैं। कलेक्टर संदेश नायक ने साफ किया है कि इस लापरवाही के लिए जो भी बिल्डर, ठेकेदार या सुपरवाइजर जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (IPC/BNS की सुसंगत धाराओं) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


​इसके साथ ही, नगर निगम और विकास प्राधिकरण (JDA) की टीम से भी इमारत के स्वीकृत नक्शे और निर्माण की वैधता की जांच करने को कहा गया है। राज्य सरकार की ओर से जल्द ही मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए उचित आर्थिक मुआवजे की घोषणा भी की जा सकती है। फिलहाल, पूरा फोकस आमेर के इस क्रैश साइट पर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को सुरक्षित रूप से पूरा करने पर है।

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