मिडिल ईस्ट में लंबे समय से सुलग रही युद्ध की चिंगारी अब एक भीषण वैश्विक संकट का रूप ले चुकी है, जहाँ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य ढांचों को हिलाकर रख दिया है। ओमान की खाड़ी के पास दक्षिणी ईरान में स्थित कोनार्क नेवल बेस पर हुआ हालिया हमला न केवल सैन्य क्षति का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र में बदलते शक्ति संतुलन की एक डरावनी तस्वीर भी पेश करता है। रविवार को जारी हुई नवीनतम सैटेलाइट तस्वीरों ने इस तबाही की पुष्टि की है, जिसमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि ईरान के तीन शक्तिशाली युद्धपोत समुद्र की गहराइयों में समा चुके हैं। इन तस्वीरों में बेस के भीतर स्थित कई प्रमुख प्रशासनिक और सैन्य इमारतें मलबे के ढेर में तब्दील नजर आ रही हैं। हालांकि ईरान या अमेरिका की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक नुकसान का विस्तृत आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इस हमले ने ईरान की नौसैनिक क्षमताओं को इतना गहरा जख्म दिया है जिससे उबरने में उसे सालों लग सकते हैं।
इस पूरे सैन्य घटनाक्रम की जड़ें अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में छिपी हैं, जिसे इजरायल का पूर्ण रणनीतिक और सैन्य समर्थन प्राप्त है। अमेरिका का तर्क है कि ईरान लगातार अपनी परमाणु गतिविधियों को बढ़ा रहा था, जो वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका था। कई दौर की चेतावनियों के बाद भी जब ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक नहीं लगाई, तब वॉशिंगटन और यरूशलेम ने मिलकर इस निर्णायक कार्रवाई का फैसला किया। इस तनाव ने तब और भी भयानक मोड़ ले लिया जब शनिवार को यह खबर आई कि अमेरिका और इजरायल के एक संयुक्त हमले में ईरान के सबसे ताकतवर और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। खामेनेई की मृत्यु ने ईरान के भीतर और उसके समर्थक गुटों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप ईरान ने अब खुलकर युद्ध का ऐलान कर दिया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने पश्चिम एशिया के सात अलग-अलग देशों में स्थित अमेरिकी एयरबेसों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी हैं।
जैसे-जैसे मिसाइल हमलों का यह सिलसिला बढ़ रहा है, वैसे-वैसे दुनिया भर में तीसरे विश्व युद्ध की आहट तेज होती जा रही है। कोनार्क नेवल बेस पर हुआ यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख जलमार्ग है। इस बेस की तबाही का मतलब है कि अब ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की निगरानी करने की क्षमता बेहद सीमित हो गई है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने नेता की मौत और अपने सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों का बदला लिए बिना शांत नहीं बैठेगा। दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल ने अपने सुरक्षा घेरे को और मजबूत कर लिया है और वे ईरान के किसी भी बड़े पलटवार का जवाब देने के लिए तैयार हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस समय पूरी तरह विफल नजर आ रही है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संगठन दोनों पक्षों को शांत करने में असमर्थ दिख रहे हैं।
आने वाले दिन न केवल मिडिल ईस्ट के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। यदि ईरान अपनी मिसाइल क्षमता का उपयोग करके अमेरिकी ठिकानों पर बड़े हमले जारी रखता है, तो अमेरिका अपनी पूरी सैन्य शक्ति के साथ तेहरान पर धावा बोल सकता है। तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटें पहले ही दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने लगी हैं। Doon Prime News इस पूरे संघर्ष पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए है और हम हर एक छोटी-बड़ी जानकारी को पूरी सटीकता के साथ आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब देखना यह होगा कि क्या दुनिया के बड़े देश मिलकर इस युद्ध को रोकने में सफल होते हैं या फिर यह संघर्ष मानव इतिहास की सबसे बड़ी विनाशकारी जंग में तब्दील हो जाएगा।
महायुद्ध की आहट: अमेरिका-इजरायल ने ईरान के ‘कोनार्क नेवल बेस’ को किया तबाह, 3 युद्धपोत डूबे, मलबे में तब्दील हुईं इमारतें
On: March 2, 2026 9:37 AM









