Emmanuel Macron तीन दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंच चुके हैं। 17 से 19 फरवरी तक चलने वाली यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग तेजी से गहराता जा रहा है। इसी कारण विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या फ्रांस अब भारत के लिए वही भूमिका निभा रहा है, जो दशकों तक रूस निभाता रहा — एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक रक्षा साझेदार के रूप में।
राष्ट्रपति मैक्रों अपनी इस यात्रा के दौरान Narendra Modi से विस्तृत वार्ता करेंगे। दोनों नेता भारत-फ्रांस सामरिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे और सहयोग को नई एवं उभरती तकनीकों तक विस्तारित करने पर विचार करेंगे। मंगलवार शाम दोनों नेता संयुक्त रूप से ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ का शुभारंभ भी करेंगे। यह मैक्रों की भारत की चौथी, लेकिन मुंबई की पहली आधिकारिक यात्रा है।
रक्षा सहयोग: संबंधों की केंद्रीय धुरी
भारत और फ्रांस के संबंधों में रक्षा क्षेत्र हमेशा से सबसे अहम स्तंभ रहा है। हाल के वर्षों में यह सहयोग और अधिक सशक्त हुआ है। विशेष रूप से राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी है। भारत सरकार की रक्षा खरीद परिषद द्वारा फ्रांस से 100 से अधिक राफेल विमानों की खरीद के फैसले ने इस साझेदारी को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
यह सौदा केवल विमानों की आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशिक्षण, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति और तकनीकी सहयोग जैसे दीर्घकालिक आयाम भी शामिल हैं। इससे भारतीय वायुसेना की क्षमता में वृद्धि होगी और भारत के रक्षा आधुनिकीकरण को गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी रक्षा डील फ्रांस को भारत के लिए एक प्रमुख और भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में स्थापित कर रही है — ठीक उसी तरह जैसे अतीत में रूस रहा है।
सह-विकास और सह-उत्पादन की नई दिशा
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन पर बढ़ता जोर है। बेंगलुरु में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों — Rajnath Singh और Catherine Vautrin — की अगुवाई में भविष्य की रक्षा रूपरेखा पर चर्चा होगी। उम्मीद है कि अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग समझौते का नवीनीकरण किया जाएगा।
इसके अलावा ‘हैमर’ मिसाइलों के संयुक्त निर्माण के लिए एक संयुक्त उद्यम पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी संभावित हैं। यह कदम दर्शाता है कि भारत-फ्रांस रक्षा संबंध अब केवल खरीददार-विक्रेता तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि तकनीक हस्तांतरण और साझे उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
हिंद-प्रशांत और वैश्विक मुद्दों पर साझी सोच
मुंबई और दिल्ली में होने वाली बैठकों में दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना दोनों देशों की साझा प्राथमिकताएं हैं। भारत और फ्रांस दोनों ही रणनीतिक स्वायत्तता को महत्व देते हैं, जो उनकी साझेदारी को विशेष बनाता है।
एआई और नवाचार में सहयोग
राष्ट्रपति मैक्रों दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भी भाग लेंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर भी विचार होगा। ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ इसी व्यापक तकनीकी साझेदारी का प्रतीक है।
क्यों कहा जा रहा है ‘नया रूस’?
भारत और रूस के बीच दशकों पुराना रक्षा सहयोग रहा है। अब फ्रांस जिस प्रकार उच्च तकनीक, दीर्घकालिक रखरखाव, सह-विकास और रणनीतिक भरोसे पर आधारित सहयोग की पेशकश कर रहा है, उससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि फ्रांस भारत के रक्षा आधुनिकीकरण का एक प्रमुख स्तंभ बनता जा रहा है।
हाल के वर्षों में फ्रांस ने भारत को उन्नत सैन्य प्लेटफॉर्म और तकनीकी सहयोग प्रदान कर यह संकेत दिया है कि वह केवल एक आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि एक स्थायी और विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बनना चाहता है। यही कारण है कि मैक्रों की यह यात्रा केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत-फ्रांस संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
फ्रांस के साथ भारत की बढ़ती करीबी: मुंबई में मोदी–मैक्रों बैठक आज, राफेल डील पर लग सकती है मुहर
On: February 17, 2026 4:39 AM










