पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव गहराता जा रहा है। भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ‘वॉटर स्ट्राइक’ को अंजाम दिया और देर रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया। इस हालात को देखते हुए भारत ने न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा है, बल्कि देशभर में मॉक ड्रिल्स और आपातकालीन तैयारियों को भी तेज कर दिया गया है।
इसी कड़ी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में एक उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में चारधाम यात्रा की सुरक्षा, राज्य के महत्वपूर्ण बांधों, राष्ट्रीय संस्थानों और ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढिलाई न बरती जाए। चूंकि इन दिनों चारधाम यात्रा पूरे जोर पर है और देशभर से हजारों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, ऐसे में यात्रा मार्गों, ठहराव स्थलों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा राज्य में मौजूद बड़े और छोटे डैम्स की सुरक्षा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए। टिहरी डैम, जो भारत का सबसे ऊंचा और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बांध है, उसकी सुरक्षा बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। टिहरी बांध से देश के कई राज्यों को बिजली की आपूर्ति होती है, इसलिए इसकी सुरक्षा किसी भी हाल में खतरे में नहीं पड़नी चाहिए। अन्य डैम्स और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भी अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों को भी सतर्क रहने के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा गया है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य की मशीनरी पूरी तरह तैयार रहनी चाहिए।
उत्तराखंड सरकार की यह बैठक देश में बढ़ते सुरक्षा तनाव के बीच एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे राज्य के नागरिकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।







