भारत की GDP ने एक बार फिर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए देश की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) 7.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले अनुमानों और बाजार की उम्मीदों से कहीं अधिक है, जिसने आर्थिक विशेषज्ञों को सकारात्मक रूप से चौंका दिया है।
आधार वर्ष में बदलाव: विकास को मिली नई परिभाषा
इस बड़ी वृद्धि के पीछे मुख्य कारण जीडीपी की गणना के लिए अपनाई गई नई सीरीज है। सरकार ने अब वर्ष 2022-23 को नया आधार वर्ष (Base Year) मानते हुए राष्ट्रीय खातों के आंकड़े जारी किए हैं। इससे पहले जीडीपी की गणना 2011-12 के आधार वर्ष पर की जा रही थी।
आधार वर्ष में इस बदलाव के कारण आंकड़ों में स्पष्ट उछाल दिखाई दे रहा है। पुरानी सीरीज (2011-12) के तहत जहां विकास दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान था, वहीं नई सीरीज के लागू होने के बाद यह 0.3 प्रतिशत अंक बढ़कर 7.6 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
गणना की आधुनिक तकनीक और व्यापक कवरेज
सांख्यिकी मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह संशोधन केवल कागजी नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था के बेहतर आकलन और व्यापक कवरेज का परिणाम है। नई प्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
- व्यापक डेटाबेस: नई सीरीज में कंपनियों के एक बहुत बड़े डेटाबेस को जोड़ा गया है। इससे पहले जो व्यावसायिक इकाइयां गणना से बाहर रह जाती थीं, उन्हें भी अब आर्थिक गतिविधियों के दायरे में लाया गया है।
- डबल डिफ्लेशन तकनीक: पहली बार गणना में ‘डबल डिफ्लेशन’ (Double Deflation) जैसी आधुनिक पद्धति का उपयोग किया गया है। यह तकनीक इनपुट और आउटपुट दोनों स्तरों पर मुद्रास्फीति को समायोजित करती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों (जैसे विनिर्माण और सेवा) की ‘वास्तविक’ वृद्धि का अधिक सटीक पता चलता है।
- सटीक एक्सट्रापोलेशन: सांख्यिकीय अनुमान लगाने की नई विधियों से डेटा के अंतर को कम किया गया है।
पिछले वर्षों के आंकड़ों में भी हुआ संशोधन
नई सीरीज के लागू होने का असर केवल वर्तमान वर्ष पर ही नहीं, बल्कि पिछले वर्षों के प्रदर्शन पर भी पड़ा है। संशोधित आंकड़ों के अनुसार: - वित्त वर्ष 2024-25 (FY25): विकास दर को 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया गया है।
- वित्त वर्ष 2023-24 (FY24): इस वर्ष की वृद्धि दर अब 9.2% के बजाय 9.5% मानी जाएगी।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले तीन वर्षों से लगातार उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
तिमाही दर तिमाही: स्थिरता की मिसाल
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में एक दुर्लभ स्थिरता (Consistency) देखी गई है। तिमाही आंकड़ों (Quarterly Data) पर नजर डालें तो विकास का पहिया हर स्तर पर तेजी से घूमा है:
| तिमाही (Quarter) | संशोधित विकास दर (%) |
|—|—|
| Q1 (अप्रैल-जून) | 7.9% |
| Q2 (जुलाई-सितंबर) | 8.1% |
| Q3 (अक्टूबर-दिसंबर) | 7.6% |
विशेष रूप से, पहली छमाही (H1) के आंकड़ों को भी अपडेट किया गया है। जहां पहले Q1 की दर 7.8% बताई गई थी, वह अब 7.9% है। इसी तरह Q2 को 8.2% से संशोधित कर 8.1% किया गया है।
आर्थिक विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नई सीरीज और आधार वर्ष में बदलाव से भारत की अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर दुनिया के सामने आएगी। आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि पिछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। डिजिटल इकोनॉमी, स्टार्टअप ईकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश को पुरानी सीरीज में सही जगह नहीं मिल पा रही थी।
7.6% की यह वृद्धि न केवल घरेलू उपभोग को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि भारत वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एक “ब्राइट स्पॉट” बना हुआ है।
निष्कर्ष
सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से नीति निर्माताओं को भविष्य की योजनाएं बनाने में अधिक सटीकता मिलेगी। यदि विकास की यह रफ्तार जारी रहती है, तो भारत बहुत जल्द $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच जाएगा।











