गंगा दशहरा के पावन अवसर पर अयोध्या में राम मंदिर के पहले तल पर राम दरबार की भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। अभिजीत मुहूर्त में आयोजित इस अनुष्ठान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने देव विग्रहों का अभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और हवन की सुगंध से मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। सुबह छह बजे से शुरू हुए विधिविधान ने रामनगरी में एक नई धार्मिक चेतना भर दी।
राम दरबार की मूर्तियों को इस अवसर पर विशेष आभूषण पहनाए गए। राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी की प्रतिमाओं को भव्य रूप से सजाया गया। सीएम योगी के साथ अयोध्या के 19 प्रमुख संत, धर्माचार्य, विहिप व ट्रस्ट के पदाधिकारी भी समारोह में शामिल हुए। इसके पहले मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी में भी दर्शन किए और रामकथा पार्क में जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया।
राम दरबार की मूर्तियाँ उच्च गुणवत्ता वाले संगमरमर से निर्मित की गई हैं, जिनका चयन मूर्तिकार सत्यनारायण पांडेय और IIT हैदराबाद की वैज्ञानिक टीम ने मिलकर किया। इन पत्थरों की मजबूती, नमी प्रतिरोधक क्षमता और चमक को वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद प्रमाणित किया गया। मूर्तियों की निर्माण प्रक्रिया में छह महीने का समय लगा, जिसमें हर पहलू पर सूक्ष्मता से ध्यान दिया गया।
राम दरबार की मूर्ति सिंहासन सहित सात फुट ऊँची है, जिसमें सीताराम की प्रतिमा सबसे ऊँचाई पर है। हनुमान और भरत की मूर्तियाँ बैठी मुद्रा में हैं, जबकि लक्ष्मण व शत्रुघ्न खड़े रूप में दर्शाए गए हैं। यह निर्माण न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला और वैज्ञानिक सोच का अद्भुत संगम भी है। आने वाली पीढ़ियाँ इस दिव्य आयोजन को एक स्वर्णिम विरासत के रूप में याद रखेंगी।
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