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किश्तवाड़ में तबाही का आलम, 38 शव मिले; 200 से अधिक लोग अब भी लापता

On: August 14, 2025 2:19 PM
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किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर) – मानसून की बारिश इस बार किश्तवाड़ जिले में स्थित मचैल चंडी माता मंदिर के मार्ग पर भारी कहर बनकर टूटी। गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे चशोती गांव के ऊपरी पहाड़ों पर बादल फटने से अचानक आई भीषण बाढ़ ने पूरे इलाके को दहला दिया। आठ किलोमीटर दूर मचैल मंदिर जाने वाले इस मार्ग पर देखते ही देखते शांत पहाड़ मौत के सैलाब में बदल गए। पानी के तेज बहाव ने घर, वाहन, लंगर और लोगों को बहा दिया। चारों ओर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

गांव का आधा हिस्सा बर्बाद

चशोती नाले में आए उफान ने अपने साथ मिट्टी, मलबा और बड़े पत्थर बहाकर लाए, जिससे आधा गांव तबाही की चपेट में आ गया। करीब 12 घर पूरी तरह से ध्वस्त हो गए, जबकि कई मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा। कई वाहन बाढ़ में बह गए और बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए।

श्रद्धालुओं का लंगर भी तबाह

मचैल माता यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के लिए चशोती में लगाया गया एक बड़ा लंगर भी बाढ़ में बह गया। यह लंगर उधमपुर के सैला तालाब क्षेत्र के लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा था। हादसे के समय लंगर में दोपहर का भोजन चल रहा था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, रसोइये और सेवादार मौजूद थे।

स्थानीय चालक बने देवदूत

बाढ़ आने के तुरंत बाद मचैल यात्रियों को मोटरसाइकिल से ले जाने वाले स्थानीय चालक सबसे पहले राहत और बचाव कार्य में जुट गए। चशोती पुल से लगभग 200 मीटर दूर खड़े इन चालकों ने बिना समय गंवाए घायलों को पांच किलोमीटर दूर हमोरी लंगर तक पहुंचाया। वहां मौजूद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और लंगर संचालक स्वयंसेवकों ने घायलों को प्राथमिक उपचार देना शुरू किया।

मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका

हमोरी लंगर में लाए गए 25 घायलों में से एक ने इलाज शुरू होने से पहले ही दम तोड़ दिया, जबकि एक महिला की हालत नाजुक बताई जा रही है। हादसे के करीब ढाई घंटे बाद दो डॉक्टर और पैरामेडिकल टीम मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके पास दवाओं और उपकरणों की कमी थी।
अभी तक मृतकों की संख्या 38 बताई जा रही है, लेकिन अनुमान है कि यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि कई लोग अब भी मलबे में दबे हो सकते हैं।

200 से अधिक लोग अब भी लापता

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, 200 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इनमें लंगर में मौजूद श्रद्धालु, सेवादार, रसोइये और अन्य लोग शामिल हैं। हादसे की जगह वाहन स्टॉप और सुरक्षा जांच चौकी भी थी, जहां सेना, सीआईएसएफ और एसडीआरएफ के जवान तैनात थे, लेकिन बाढ़ के बाद से उनका भी कोई पता नहीं चल पा रहा है।

राहत कार्य जारी

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश के कारण बचाव अभियान में कठिनाई आ रही है। प्रशासन ने कहा है कि प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और घायलों के इलाज पर है।

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