राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की रिपोर्ट के अनुसार देहरादून में महिलाओं की सुरक्षा अभी भी गंभीर चिंता का विषय है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शहर में 55% महिलाएं अश्लील टिप्पणियों और 50% महिलाएं सार्वजनिक परिवहन में उत्पीड़न का सामना कर रही हैं।
प्रमुख आंकड़े
शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न: 21% महिलाएं शारीरिक और 10% मानसिक उत्पीड़न झेल रही हैं।
पड़ोसी और कार्यस्थल उत्पीड़न: 19% महिलाओं को पड़ोसियों और 13% को कार्यस्थल पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत और रिपोर्टिंग: उत्पीड़न का शिकार 40% महिलाओं ने शिकायत करने के बजाय उस क्षेत्र में जाना छोड़ दिया। केवल 26% ने अधिकारियों को सूचित किया, जबकि सिर्फ 4% ने पुलिस एप के जरिए मदद मांगी।
सुरक्षा की धारणा
दिन और रात में अंतर: दिन में 70% महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं, लेकिन रात में यह आंकड़ा घटकर 44% रह जाता है।
महिला-अनुकूल बुनियादी ढांचा: केवल 24% महिलाएं इसे अत्यधिक सुरक्षित मानती हैं।
सुधार और स्थिति का आकलन: 28% ने सुरक्षा में सुधार महसूस किया, जबकि 23% ने हालात खराब होने की बात कही।
शिकायत दर
देहरादून में केवल 6% महिलाओं ने सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न की शिकायत की, जो राष्ट्रीय औसत 7% से कम है।
महिलाओं के सुझाव
सर्वेक्षण में महिलाओं ने कई उपाय सुझाए हैं:
45% ने पुलिस सुरक्षा बढ़ाने की मांग की
18% ने हर जगह महिला पुलिस तैनात करने की बात कही
39% ने महिला सुरक्षा आधारभूत संरचना सुधारने की आवश्यकता जताई
28% ने सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की सलाह दी
21% ने आत्मरक्षा प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई
13% ने कड़े कानून प्रवर्तन की मांग की
11% ने पैनिक बटन और सुरक्षा एप की वकालत की
9% ने सार्वजनिक जगहों पर उचित प्रकाश व्यवस्था की सिफारिश की
निष्कर्ष
रिपोर्ट के अनुसार देहरादून महिला सुरक्षा के मामले में देश के 31 शहरों में असुरक्षित शहरों की सूची में शामिल है। दिन के मुकाबले रात में सुरक्षा की चिंता अधिक है। हालांकि, पुलिस, सार्वजनिक परिवहन और बुनियादी ढांचे में सुधार से महिलाओं के लिए शहर को सुरक्षित बनाया जा सकता है।






