हरिद्वार: सिडकुल थाना क्षेत्र के आईआईडीसी सेक्टर में स्थित एक दवा निर्माण इकाई पर केंद्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी), राज्य व केंद्रीय औषधि विभाग तथा हरिद्वार पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में अवैध तरीके से दवाओं का निर्माण होता पाया गया, जिसके चलते भारी मात्रा में तैयार दवाएं और कच्चा माल जब्त कर फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
कार्रवाई में फैक्ट्री संचालक सुनील कुमार वर्मा पुत्र चैन सुख, निवासी बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) को मौके से हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि दवा निर्माण उसी की निगरानी में हो रहा था। बाद में एनसीबी की टीम आरोपी को अपने साथ दिल्ली ले गई।
इस संयुक्त छापेमारी की कार्रवाई देहरादून सब-जोन की औषधि निरीक्षक अनीता भारती को मिली एक गोपनीय सूचना के आधार पर की गई। जानकारी मिली थी कि एक पुराने नारकोटिक्स केस की जांच के दौरान इस फैक्ट्री की संदिग्ध गतिविधियों का पता चला था। सूचना पुख्ता पाए जाने पर टीम ने फैक्ट्री पर दबिश दी, जहां दवाओं का निर्माण कार्य सक्रिय अवस्था में पाया गया।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि फैक्ट्री के पास दवा निर्माण का कोई वैध लाइसेंस नहीं था, और वह केवल खाद्य लाइसेंस के आधार पर औषधियों का निर्माण कर रहा था। प्राथमिक स्तर पर कुछ जब्त दवाओं में नारकोटिक तत्वों की मौजूदगी की आशंका भी जताई गई है। एनसीबी की टीम ने संपूर्ण दवा स्टॉक और कच्चे माल को सील करते हुए जब्त कर लिया और उन्हें परीक्षण के लिए अपने साथ ले गई।
राज्य व केंद्रीय औषधि विभाग की टीमों ने भी फैक्ट्री से अलग-अलग दवाओं के सैंपल लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस बीच फैक्ट्री को सील कर पुलिस की निगरानी में रखा गया है।
कार्रवाई में शामिल अधिकारी:
एनसीबी टीम: इंस्पेक्टर पारस नाथ, सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार, अजीत सिंह मीणा, सिपाही अमन शर्मा
राज्य औषधि विभाग: अनीता भारती, हरीश सिंह, मेघा (हरिद्वार), अमित कुमार आज़ाद (रुद्रप्रयाग), ऋषभ धामा (टिहरी)
केंद्रीय औषधि विभाग: सहायक औषधि नियंत्रक कमल हलदार, डॉ. मनीष कुमार, अंजन कुमार, महेन्द्र सिंह
हरिद्वार पुलिस टीम: सब-इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह, सिपाही कुलदीप डिमरी, कुलदीप सिंह, सुनील सैनी, अनिल कंडारी
इस कार्रवाई ने जिले में चल रहे अवैध औषधि कारोबार की सच्चाई उजागर कर दी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दवा निर्माण से जुड़े ऐसे गैरकानूनी कारखानों के खिलाफ आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।





