दून के उद्योगपति सुधीर विंडलास और उनके सहयोगियों पर राजपुर में सरकारी जमीन पर कब्जा करने और धोखाधड़ी से बेचने का आरोप है। मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कर रही है। आरोप है कि आरोपितों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन अपने नाम करवाई और फिर बेची। पुलिस ने इस मामले में चार एफआईआर दर्ज की थीं।
ईडी ने इन चार मुकदमों के आधार पर मनी लांड्रिंग जांच शुरू की है। आरोपितों में सुधीर विंडलास और राजपुर रोड पर कैफे संचालक गोपाल गोयनका शामिल हैं। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने दो-आधा हेक्टेयर भूमि खरीदी और आसपास की जमीन कब्जा कर ली। इसके अलावा, कई अन्य भूमि फर्जीवाड़ों की भी जानकारी मिली है।
जांच के दौरान ईडी ने तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक, नायब तहसीलदार और तहसीलदार से भी पूछताछ की। सरकारी अधिकारियों ने भी यह माना कि आरोपितों ने धोखाधड़ी कर जमीन अपने नाम करवाई।
इस मामले की शुरुआत 2018 में हुई थी, जब राजपुर निवासी दुर्गेश गौतम ने एसआईटी (भूमि) को शिकायत दी। इसके बाद 2022 में दून पैरामेडिकल कॉलेज के संचालक संजय सिंह चौधरी और ले. कर्नल सोबन सिंह दानू (रिटा.) ने भी फर्जी कब्जा और बिक्री के आरोप में मुकदमे दर्ज कराए।





