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इगास पर्व की रौनक: गृह मंत्री अमित शाह ने सांसद अनिल बलूनी के साथ मनाया पर्व, उत्तराखंड में भैलो खेल की धूम

On: November 1, 2025 7:08 AM
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उत्तराखंड में पारंपरिक लोक पर्व इगास-बग्वाल पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी लोक परंपराएं और संस्कृति ही देवभूमि की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की आत्मा उसकी लोक संस्कृति में बसती है और इगास पर्व इसी आत्मा का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे पारंपरिक त्योहारों और लोक परंपराओं को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि जैसे पूरे देश में सांस्कृतिक गौरव का पुनर्जागरण हो रहा है, वैसे ही उत्तराखंडवासी भी अपनी जड़ों से जुड़कर इगास पर्व को नए जोश के साथ मना रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि इगास पर्व को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने इस दिन को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, ताकि प्रवासी उत्तराखंडवासी भी अपने पैतृक गांवों में लौटकर इस पर्व का आनंद ले सकें।
दिल्ली में भी गूंजी देवभूमि की संस्कृति: अनिल बलूनी के आवास पर भव्य आयोजन
दिल्ली में उत्तराखंड की झलक उस समय देखने को मिली जब सांसद अनिल बलूनी के आवास पर इगास पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, एनएसए अजीत डोभाल, बाबा बागेश्वर धाम, और प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल सहित कई जानी-मानी हस्तियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
सांसद बलूनी ने कहा कि इगास पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह हमारी पहचान और अपनी जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने उत्तराखंड के सभी प्रवासी लोगों से आह्वान किया कि वे जहां भी हों, इस लोक पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाएं और अपनी संस्कृति को जीवित रखें।


भव्य पर्व की शुभकामनाएं: नेताओं ने किया लोक संस्कृति के संरक्षण का आह्वान
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी प्रदेशवासियों को इगास की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पर्व देवभूमि की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने आग्रह किया कि सभी सांसद, विधायक और कार्यकर्ता अपने गांवों में लौटकर जनता के साथ इस पर्व को मनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकें।
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने भी इगास पर्व को उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि दीपावली के 11 दिन बाद मनाया जाने वाला यह त्योहार “भैलो” और “झुमैलो” जैसे पारंपरिक नृत्यों के साथ गांवों में हर्षोल्लास का माहौल बना देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोक पर्व युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और पहचान से जोड़ने का माध्यम हैं।
इगास पर्व की पौराणिक मान्यता: वीर माधो सिंह भंडारी की वीरता से जुड़ी कथा
इगास-बग्वाल पर्व के पीछे एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि टिहरी राजशाही काल में राजा के सेना नायक वीर माधो सिंह भंडारी अपनी सेना के साथ तिब्बत सीमा पर युद्ध के लिए गए थे। दीपावली के समय जब वे घर नहीं लौट पाए, तो लोगों ने समझा कि वे वीरगति को प्राप्त हो गए हैं।
परंतु दीपावली के 11वें दिन यह शुभ समाचार मिला कि उन्होंने युद्ध में विजय प्राप्त की है और सकुशल लौट रहे हैं। उसी दिन से इस जीत की खुशी में इगास पर्व मनाने की परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज तक उत्तराखंड की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।
बौराड़ी में होगी भव्य प्रस्तुति: 200 सामूहिक भैलो होंगे आकर्षण का केंद्र
इगास पर्व के अवसर पर टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में विशेष सांस्कृतिक आयोजन किए जा रहे हैं। नवयुवक अभिनय श्रीरामकृष्ण लीला समिति 1952, जिला प्रशासन और नगर पालिका के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को दोपहर दो बजे से कार्यक्रम आरंभ होगा।
कार्यक्रम में पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता, झुमैलो नृत्य और वीर भड़ माधो सिंह भंडारी के जीवन पर आधारित नाटिका का मंचन होगा। शाम के समय 200 सामूहिक भैलो का भव्य प्रदर्शन आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेगा। समिति के अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल ने बताया कि इस वर्ष का आयोजन यादगार बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
संस्कृति से जुड़ाव ही असली पहचान
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संदेश में कहा कि हमारा नैतिक दायित्व है कि हम सदियों से चली आ रही इस सांस्कृतिक विरासत को और व्यापक रूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि इगास अब केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के अन्य राज्यों और विदेशों में बसे उत्तराखंडी भी इसे मनाने लगे हैं।
इगास पर्व आज उत्तराखंड की लोक संस्कृति, एकता और परंपरा का प्रतीक बन गया है। यह केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, अपनी मिट्टी और अपनी पहचान के प्रति आस्था का उत्सव है।

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