देहरादून। प्रदेश सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग एक्ट लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं, लेकिन इससे पहले केंद्र सरकार के बनाए गए कानून का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि केंद्र ने किन खेलों को इसमें शामिल किया है, किन्हें बाहर रखा है और किन प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाई गई है।
देश में ऑनलाइन गेमिंग का बाजार लगातार तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल और इंटरनेट के जरिये चलने वाले तमाम गेमिंग एप और वेबसाइटें युवाओं को अपनी ओर खींच रही हैं। इनमें क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेलों पर दांव लगाने के साथ-साथ लूडो, शतरंज, ताश और अन्य गेम भी शामिल हैं। खासतौर पर “रियल मनी गेमिंग” ने युवा पीढ़ी को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई लोग इसमें अपना सब कुछ दांव पर लगाकर वर्षों की कमाई गंवा चुके हैं।
कुछ समय पहले केंद्र सरकार के निर्देशों के आधार पर राज्य सरकार ने भी एक प्रारूप तैयार किया था। इस प्रस्तावित एक्ट में ऑनलाइन गेम संचालित करने वाली कंपनियों को लाइसेंस देने की व्यवस्था की गई थी। सरकार का मानना है कि चूंकि यह खेल मनोरंजन की श्रेणी में आते हैं, इसलिए इन पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा, जिससे राज्य को अच्छा राजस्व लाभ हो सकता है। उस प्रारूप में “गेम ऑफ स्किल” यानी कौशल आधारित खेलों को छूट देने का प्रावधान था, जबकि खुलेआम खेले जाने वाले जुए पर सख्त प्रतिबंध रखा गया था।
उधर, केंद्र सरकार ने हाल ही में अपना ऑनलाइन गेमिंग कानून लागू किया है, जिसमें मनी गेमिंग को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कानून में सख्त दंड के प्रावधान भी किए गए हैं ताकि युवा वर्ग को इस जाल से बचाया जा सके। अब प्रदेश सरकार नए हालात को देखते हुए अपने प्रस्तावित एक्ट पर दोबारा विचार कर रही है।
राज्य सरकार फिलहाल केंद्र के एक्ट का अध्ययन कर रही है। इसमें देखा जा रहा है कि केंद्र ने किन खेलों पर रोक लगाई है और किन्हें मान्यता दी है। गृह सचिव शैलेश बगौली ने कहा कि राज्य में अपना एक्ट बनाने से पहले केंद्र के प्रावधानों का विस्तार से विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद ही प्रदेश का नया ऑनलाइन गेमिंग एक्ट अंतिम रूप लेगा।






