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जमीन अधिग्रहण में बड़ा फैसला: देहरादून के नौ गांवों के परिवारों को अब तीन गुना अधिक मिलेगा मुआवजा

On: September 16, 2025 9:51 AM
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देहरादून में लखवाड़-व्यासी बहुद्देश्यीय जल विद्युत परियोजना और त्यूणी-प्लासू जल विद्युत परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए राज्य शासन ने बड़ा फैसला लिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के प्रस्ताव पर शासन ने प्रभावित परिवारों को तीन गुना अधिक मुआवजा देने का निर्णय लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले से कालसी तहसील के नौ जनजातीय गांवों — धनपो, लखवाड़, लक्स्यार, खुन्ना, अलमान, लुधेरा, खाती, दाऊ और सरयाना — के परिवारों को राहत मिलेगी। इन गांवों में भूमि के कम सर्किल रेट की वजह से लंबे समय से मुआवजा दरों में असमानता बनी हुई थी, जिसके कारण प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा था।

असमान मुआवजा दरों को लेकर बढ़ा विवाद

लंबे समय से प्रभावित परिवारों द्वारा मुआवजा दरों में समानता और न्याय की मांग की जा रही थी। विशेष रूप से कालसी तहसील के जनजातीय क्षेत्र में भूमि का क्रय-विक्रय बेहद कम होता है, जिसके कारण यहाँ का सर्किल रेट अन्य क्षेत्रों की तुलना में बहुत कम था। उदाहरण के तौर पर, कालसी क्षेत्र में सर्किल रेट 13.20 लाख से 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर था, जबकि नजदीकी टिहरी जिले में यह 70-72 लाख रुपये और विकासनगर तहसील में एक करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुँचता था। इस असमानता के कारण प्रभावित परिवारों में गहरा असंतोष व्याप्त था।

इस पर ध्यान देते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने मुआवजा दरों की पुनः समीक्षा के लिए उप जिलाधिकारी कालसी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। इसमें उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के प्रतिनिधि तथा संबंधित सब रजिस्ट्रार शामिल थे। समिति ने विस्तृत सर्वेक्षण कर रिपोर्ट तैयार की और शासन को दरों में संशोधन का प्रस्ताव भेजा। राज्य सरकार ने इसे मंजूरी देते हुए प्रमुख सचिव डॉ. आर. मिनाक्षी सुंदरम की सहमति से मुआवजा दरों को तीन गुना बढ़ा दिया।

मुआवजा वितरण की प्रक्रिया होगी तेज

जिलाधिकारी बंसल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित परिवारों को नया बढ़ा हुआ मुआवजा शीघ्र वितरित करें। उनका कहना है कि इस फैसले से न केवल प्रभावित परिवारों को न्याय मिलेगा, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय हित में महत्वपूर्ण जल विद्युत परियोजनाएं भी समय से पूरी हो सकेंगी।
वर्तमान में लखवाड़ परियोजना के लिए कुल 45.317 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसमें से 19.27 करोड़ रुपये अनुग्रह अनुदान के रूप में प्राप्त हुए, जिनमें से 17.85 करोड़ रुपये का वितरण प्रभावितों को किया जा चुका है। त्यूणी-प्लासू परियोजना के लिए ग्राम पंचायत रायगी व बृनाड बास्तील की भूमि मिलाकर कुल 5.999 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। सर्वेक्षण और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होते ही मुआवजा वितरण शुरू होगा।

परियोजनाओं का सामूहिक महत्व

लखवाड़-व्यासी जल विद्युत परियोजना उत्तराखंड की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल है, जिससे 300 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। इस परियोजना से प्राप्त बिजली उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली समेत छह राज्यों में सप्लाई की जाएगी। इसके अलावा, यह परियोजना क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्थाओं को भी सुदृढ़ बनाएगी।
परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा, बल्कि देश में स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को भी हासिल करने में मदद मिलेगी। यह कदम उत्तराखंड सहित पूरे उत्तर भारत के लिए दीर्घकालिक विकास की दिशा में अहम साबित होगा।

प्रभावित परिवारों की उम्मीदें बढ़ीं

इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद प्रभावित परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से न्याय की आस में संघर्ष कर रहे ग्रामीण अब राहत की सांस ले सकेंगे। उन्हें उम्मीद है कि इससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा और वे नए अवसर प्राप्त करेंगे।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि मुआवजा वितरण प्रक्रिया में कोई विलंब नहीं होगा। राज्य सरकार की यह पहल प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा करते हुए परियोजनाओं को सफल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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