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हरिद्वार कुंभ 2027: केंद्र से मिले 500 करोड़, CM धामी बोले- ‘दिव्य और भव्य’ होगा आयोजन

On: March 3, 2026 5:46 AM
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हरिद्वार कुंभ 2027 के लिए 500 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा करते हुए और बैकग्राउंड में कुंभ मेले का दृश्य।

उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक अस्मिता को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उद्घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि आगामी हरिद्वार कुंभ मेला केवल एक आयोजन मात्र नहीं होगा, बल्कि इसे ‘दिव्य और भव्य’ स्वरूप प्रदान किया जाएगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बनेगा। इस महाकुंभ की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्र सरकार ने इसकी शुरुआती तैयारियों के लिए 500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की पहली किस्त जारी कर दी है। देहरादून स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार और मेला प्रशासन दिन-रात एक कर तैयारियों में जुटा है। उनका मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और वे देवभूमि से एक सुखद अनुभव लेकर लौटें।
मुख्यमंत्री धामी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कुंभ मेले के बुनियादी ढांचे और आवश्यक व्यवस्थाओं के विकास के लिए केंद्र सरकार का सहयोग किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कुंभ को अभूतपूर्व बनाने का रोडमैप पूरी तरह तैयार है। 500 करोड़ रुपये की यह राशि केवल शुरुआत है; जैसे-जैसे निर्माण और विकास के कार्य आगे बढ़ेंगे, आवश्यकतानुसार केंद्र से और अधिक वित्तीय सहायता का अनुरोध किया जाएगा। आगामी 7 मार्च को गृह मंत्री अमित शाह का हरिद्वार दौरा इस दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ वे स्वयं तैयारियों की समीक्षा करेंगे और भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह आयोजन प्रधानमंत्री मोदी के उस संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें उन्होंने इस दशक को ‘उत्तराखंड का दशक’ बताया है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि विकास की गति को इतना तीव्र किया जाए कि उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में अपनी जगह पक्की कर सके।
विकास की इस यात्रा में मुख्यमंत्री ने समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की चिंता को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचता, तब तक सरकार चैन से नहीं बैठेगी। इसी कड़ी में उन्होंने राज्य की आर्थिकी की रीढ़ मानी जाने वाली चारधाम यात्रा को लेकर भी बड़े अपडेट साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा को केवल सुगम ही नहीं, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित बनाना उनका संकल्प है। पिछली यात्रा के समापन के तुरंत बाद ही अगली यात्रा की रणनीतियां तैयार की जाने लगी थीं। होटल व्यवसायियों, परिवहन संचालकों और तीर्थ पुरोहितों जैसे सभी हितधारकों के साथ निरंतर संवाद किया जा रहा है ताकि उनके अनुभवों और सुझावों के आधार पर व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके। यह सरकार की गंभीर कार्यशैली को दर्शाता है कि वे यात्रा सीजन शुरू होने से महीनों पहले ही जमीनी स्तर पर काम शुरू कर चुके हैं।
धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने सामाजिक सरोकारों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी अपनी संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने राज्य के बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए पेंशन व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार किए हैं। अब लाभार्थियों को अपनी पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे और न ही अनिश्चितता के साये में रहना होगा। सरकार ने निर्णय लिया है कि हर महीने की 5 तारीख तक पेंशन की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से जमा कर दी जाएगी। इसके साथ ही, पेंशन की राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में एक बड़ी राहत है। एक और मानवीय पहल करते हुए अब वृद्ध दंपत्तियों में से दोनों को पेंशन देने की व्यवस्था की गई है, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
अंततः, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ये निर्णय और घोषणाएं एक नए और सशक्त उत्तराखंड की आहट हैं। कुंभ मेले के लिए 500 करोड़ की राशि का मिलना न केवल विकास कार्यों को गति देगा, बल्कि राज्य के पर्यटन और रोजगार क्षेत्र में भी नई जान फूँक देगा। बुनियादी ढांचे में सुधार, सुगम चारधाम यात्रा और सुदृढ़ सामाजिक सुरक्षा ढांचा—ये तीनों मिलकर उत्तराखंड को एक मॉडल राज्य बनाने की ओर अग्रसर कर रहे हैं। सरकार की यह सक्रियता दर्शाती है कि वह अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ-साथ आधुनिक विकास और मानवीय कल्याण के बीच एक आदर्श संतुलन बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित है।

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