हरिद्वार। लगातार हो रही भारी वर्षा का असर अब पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक साफ दिखने लगा है। सोमवार सुबह सात बजे भीमगोडा बैराज पर गंगा का जलस्तर 293.10 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 293 मीटर से ऊपर है। जबकि खतरे का निशान 294 मीटर पर है। फिलहाल बैराज से गंगा में 1,54,568 क्यूसेक पानी आ रहा है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं।
सोलानी नदी में उफान, गांवों में पानी घुसा
खानपुर क्षेत्र में पहाड़ी जिलों में हुई तेज बारिश का असर दिखा। यहां सोलानी नदी में छोड़े गए पानी से कई गांवों में जलभराव हो गया। धर्मोपुर गांव की सड़क पर पानी आने से ग्रामीण फंस गए। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकालकर सड़क पार कराई। पानी का दबाव इतना अधिक था कि सड़क का एक हिस्सा बह गया, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
नदी का पानी सड़कों पर
शनिवार देर शाम सोलानी नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि पानी तटबंध तोड़कर सड़कों पर बहने लगा। गोवर्धनपुर से धर्मोपुर गांव को जोड़ने वाली सड़क पर तेज धारा बहने लगी। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद गोवर्धनपुर चौकी प्रभारी समीप पांडे, कांस्टेबल अरविंद रावत, होमगार्ड आनंद चौधरी और फायर ब्रिगेड कर्मी प्रदीप रावत ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य चलाया। कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों को सुरक्षित पार कराया गया।
फंसे वाहनों को बाहर निकाला
पानी भरने से कई दुपहिया वाहन भी बीच रास्ते में फंस गए। राहत दल ने उन्हें बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। धर्मोपुर रोड पर पानी जमा होने से दादूपुर, खाई खेड़ी, अवदीपुर, सहीपुर, अहियापुर और आमखेड़ी समेत कई गांवों का संपर्क कट गया। देर रात तक इन गांवों की सड़कें जलमग्न रही।
गंगा में बढ़ा सिल्ट, गंगनहर बंद
लगातार बारिश से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा। शनिवार को पूरा दिन गंगा चेतावनी स्तर से ऊपर बहती रही और रविवार सुबह करीब दस बजे बैराज पर 293.05 मीटर दर्ज किया गया। तेज बहाव के साथ गंगा में सिल्ट की मात्रा भी बढ़ गई। इसके चलते उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को गंगनहर बंद करनी पड़ी।
प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग ने 27 अगस्त तक प्रदेश के पहाड़ी और मैदानी जिलों में मध्यम से भारी वर्षा का पूर्वानुमान जताया है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने तटवर्ती क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया है। बाढ़ चौकियों को पूरी सतर्कता के साथ डटे रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार निगरानी में जुटी हुई हैं ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटा जा सके।






