उत्तराखंड में नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और ड्रग कंट्रोल विभाग की संयुक्त टीम ने हरिद्वार और देहरादून में छापेमारी कर लाखों नशीले कैप्सूल और करोड़ों रुपये की प्रतिबंधित दवाएं जब्त की हैं। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो ट्रांसपोर्ट कंपनी की आड़ में अवैध कारोबार चला रहे थे।
हरिद्वार के गोदाम से 3.41 लाख कैप्सूल बरामद
शुक्रवार को ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती को सूचना मिली थी कि हरिद्वार के रानीपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित “आंचल रोड कैरियर/आंचल एक्सप्रेस” के गोदाम में भारी मात्रा में नशीली दवाएं स्टोर की गई हैं, जो विभिन्न स्थानों पर सप्लाई की जा रही थीं। इस सूचना को एएनटीएफ प्रभारी विजय सिंह और गैस प्लांट चौकी प्रभारी विकास रावत के साथ साझा किया गया, जिसके बाद पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग की टीम ने गोदाम पर छापा मारा।
जांच के दौरान, गोदाम से 24 पेटियों में रखे 3,41,568 नशीले कैप्सूल बरामद हुए। इस दौरान पुलिस ने मौके से शमशेर नामक आरोपी को गिरफ्तार किया, जो हरियाणा के भिवानी जिले के पुरनपुरा गांव का निवासी है।
देहरादून में 4.14 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित दवाएं जब्त
हरिद्वार में हुई कार्रवाई के बाद पुलिस को मामले के मास्टरमाइंड अनिल लडवाल की जानकारी मिली, जो हरियाणा के भिवानी का रहने वाला है और इस तस्करी रैकेट का मुख्य संचालक बताया जा रहा है। देर शाम पुलिस ने उसे देहरादून से गिरफ्तार कर लिया।
देहरादून के सेलाकुई स्थित उसके गोदाम की तलाशी लेने पर 2167 बॉक्स प्रतिबंधित सिरप, जिसमें कुल 2,16,700 शीशियां और 6,01,344 नशीले कैप्सूल पाए गए। इनकी अनुमानित कीमत 4.14 करोड़ रुपये आंकी गई।
नशीली दवाओं की सप्लाई का था बड़ा नेटवर्क
एसपी सिटी पंकज गैरोला के अनुसार, अनिल लडवाल दवाओं के कारोबार की आड़ में नशीली दवाओं का अवैध धंधा कर रहा था। वह सेलाकुई स्थित गोदाम से माल मंगवाकर हरिद्वार सहित अन्य जगहों पर सप्लाई करता था। इस कारोबार में उसका मौसेरा भाई शमशेर भी शामिल था, जिसे मुनाफे का एक हिस्सा दिया जाता था।
पुलिस ने दोनों गोदामों को सील कर दिया है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। इस खुलासे के बाद पुलिस को उम्मीद है कि नशीली दवाओं की तस्करी से जुड़े और भी कई अहम सुराग सामने आ सकते हैं।
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