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नैनीताल नंदा देवी महोत्सव: मां नंदा-सुनंदा का भव्य दरबार सजा, CCTV से सख्त पहरा, पशुबलि केवल स्लॉटर हाउस में

On: August 31, 2025 6:34 AM
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नैनीताल। ऐतिहासिक नंदा देवी महोत्सव इस बार भी पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। श्रीराम सेवक सभा की ओर से आयोजित इस आयोजन में मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। विधिविधान से प्राण प्रतिष्ठा के बाद इन्हें मां नयना देवी मंदिर परिसर में बने भव्य मंडप में स्थापित किया जाएगा। ब्रह्ममुहूर्त में पूजा-अर्चना के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खोले जाएंगे।

मां के दर्शन के लिए न केवल शहर, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी भक्तों के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं।

ऐसे तैयार होती हैं नंदा-सुनंदा की मूर्तियां

शनिवार को सेवा समिति हाल में मूर्ति निर्माण समिति के संयोजक चंद्रप्रकाश साह के नेतृत्व में कदली के तनों, रूई और कपड़े से मूर्तियों का निर्माण किया गया। इसमें हीरा रावत, गोधन सिंह, हरीश पंत, गोविंद सिंह, अमर साह, सागर सोनकर, आनंद बिष्ट सहित कई लोगों ने योगदान दिया। वहीं मोनिका साह, आरती सम्मल, मेघा बिष्ट और सेंट जोजफ कॉलेज के छात्र हिमांशु गुप्ता ने मूर्तियों को अंतिम आकार देने और रंग चढ़ाने का कार्य किया।

पूर्व पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी मंटू बताते हैं कि मूर्तियों के लिए पांच फीट ऊंचे केले या कदली के तनों का उपयोग होता है। खपच्चियों से चेहरे का आकार, बड़े बटन से आंख-कान-नाक और रूई से ढांचा तैयार किया जाता है। इसके बाद तीन मीटर सूती कपड़े को पीला रंग कर मूर्ति को परिधान पहनाया जाता है और फिर गहनों से सजाया जाता है। परंपरा के अनुसार, कदली का तना जल में घुलनशील होने के कारण मूर्तियों का विसर्जन झील में किया जाता है।

इतिहास की बात करें तो, नंदा देवी महोत्सव की शुरुआत 1902 में अल्मोड़ा निवासी मोतीराम साह ने की थी। 1926 से श्रीराम सेवक सभा द्वारा इसका आयोजन किया जा रहा है। नैनीताल में मूर्तिकार स्व. ठाकुर दास साह के परिवार ने वर्षों तक मूर्तियों के निर्माण की परंपरा निभाई है। बताया जाता है कि वर्ष 1955-56 तक यहां चांदी की मूर्तियां भी बनाई जाती थीं।

पशुबलि पर पूरी तरह प्रतिबंध, केवल स्लॉटर हाउस में अनुमति

हाई कोर्ट के आदेश पर इस बार भी मंदिर परिसर में पशुबलि पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। पिछले वर्ष की तरह पूजा के लिए लाए गए बकरों को पुलिस सुरक्षा में मंदिर तक लाया जाएगा और पंजीकरण के बाद वापस लौटाया जाएगा। इसके लिए हरिनगर में विशेष स्लॉटर हाउस की व्यवस्था की गई है, जिसे PCB से अनुमति भी मिल चुकी है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: CCTV और ड्रोन से निगरानी

नंदा देवी महोत्सव में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 40 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही पुलिस ड्रोन से भी लगातार निगरानी कर रही है। मेला क्षेत्र में पुलिस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

बीते दिनों मल्लीताल क्षेत्र में हुई अग्निकांड की घटना को देखते हुए इस बार विशेष एहतियात बरता गया है। मेला परिसर में दमकल वाहन तैनात किए गए हैं और दुकानों के बाहर ठेकेदारों व दुकानदारों की ओर से अग्निशमन उपकरण भी लगाए गए हैं। एसपी जगदीश चंद्रा ने बताया कि किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है।

पांच सितंबर तक चलेगा आयोजन

फ्लैट्स मैदान में दुकानों की सजावट के साथ महोत्सव का उल्लास और भी बढ़ गया है। पांच सितंबर तक चलने वाले इस महोत्सव में परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक झलक एक साथ देखने को मिल रही है।

कुल मिलाकर, नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव इस बार भी श्रद्धा और उत्साह का संगम बना हुआ है। मां नंदा-सुनंदा की भव्य मूर्तियों के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है और प्रशासन भी सुरक्षा व व्यवस्थाओं को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है।

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